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सिंचाई विभाग के ईई को आरटीआई के तहत सूचना नहीं देना महंगा पड़ गया। राज्य सूचना आयुक्त ने ईई पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए एक महीने में राजकोष में जमा कराने के आदेश दिए हैं। राजकोष में राशि जमा नहीं होने पर अधीक्षण अभियंता जुर्माना राशि को ईई के देयकों से कटौती कर जमा कराएंगे।
सिंचाई विभाग के रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी दयाधर जोशी ने 10 फरवरी 2015 को सिंचाई विभाग में हुए कार्यों के भुगतान और पेड़ों की नीलामी सहित विभिन्न बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी थी, लेकिन लोक सूचना अधिकारी / अधिशासी अभियंता ने चार बिंदुओं पर आवेदकों को सूचना नहीं दी।
इसके बाद दयाधर ने सूचना आयोग में अपील की। राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने लोक सूचना अधिकारी को नोटिस भेजकर सूचनाएं नहीं देने के लिए स्पष्टीकरण मांगा। पत्र के माध्यम से अपना पक्ष रखते हुए लोक सूचना अधिकारी ने कहा था कि चार बिंदुओं में सूचना का दिया जाना राजकीय हित में नहीं है।
दयाधर जोशी के मुताबिक इन बिंदुओं में लंबित ठेकेदारों को निर्गत अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच रिपोर्ट, निर्माण की एवज में किए भुगतान, पेड़ों की नीलामी आदि शामिल थी। लेकिन गड़बड़ियां छिपाने के मकसद से सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने लोक सूचना अधिकारी के स्पष्टीकरण का अध्ययन करने के बाद पाया कि सूचना नहीं देने के संबंध में जो स्थिति बताई गई है, वो औचित्यपूर्ण कारण नहीं है। उन्होंने चार नवंबर को मामले की सुनवाई करते हुए अधिशासी अभियंता आरएस आर्य पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाने के आदेश दिए।