रुद्रपुर। कोरोना संक्रमण काल में ड्यूटी के दौरानसैनिटाइजर, मास्क आदि उपलब्ध न कराने से गुस्साए पर्यावरण मित्रों ने सोमवार को जैविक और अजैविक कूड़ा अलग करने से इंकार कर दिया। उन्होंने ठेकेदार और नगर निगम के अधिकारियों पर पर्यावरण मित्रों की घोर उपेक्षा का भी आरोप लगाया। नगर निगम ने कूड़ा कलेक्शन का ठेका एक कंपनी को दिया है। सोमवार को किच्छा मार्ग स्थित ट्रंचिंग ग्राउंड के पास वाहनों में एकत्रित किए गए कूड़े में से जैविक और अजैविक कूड़े को अलग करने से पर्यावरण मित्रों ने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोरोना वायरस का संक्रमण चल रहा है, इसके बावजूद पर्यावरण मित्रों को मास्क व सैनिटाइजर समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इसके साथ ही वेतन में कटौती की जा रही है। उन्हें पीएफ और ईएसआई का लाभ नहीं दिया जा रहा है। सुरक्षा उपकरण न दिए जाने के विरोध में एकजुट होकर पर्यावरण मित्रों ने कूड़े को अलग-अलग करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे वह कूड़े को हाथ नहीं लगाएंगे। जिस पर कपंनी के प्रबंधक ने श्मसान घाट परिसर के पास पर्यावरण मित्रों को बुलाकर उन्हें समझाने का प्रयास किया, जहां दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई। देवभूमि सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुनील रोतगी ने कहा कि पर्यावरण मित्रों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पर्यावरण मित्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें 15 हजार के स्थान पर मात्र आठ हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है। वहां पर पर्यावरण मित्र प्रमोद, विशाल, शिवम, रोहित आदि थे।