परिचालकों की ओर से सांसद सहित अन्य कोटे में टिकट काटे जाने के मामले की जांच शुरू हो गई है। परिवहन विभाग मुख्यालय के आईटी विभाग अधिकारियों ने डिपो पहुंचकर कर्मचारियों से पूछताछ करने के बाद संबंधित दस्तावेज जब्त कर लिए।
परिवहन निगम देहरादून आईटी सेक्शन के सहायक लेखाकार रजनीश गुप्ता और प्रदीप जैन बुधवार शाम को डिपो पहुंचे। उन्होंने डिपो के ईबीटीएम कक्ष में मौजूद चार कर्मचारियों से प्रकरण संबंधित जानकारी ली। उन्होंने सांसद, विधायक, पूर्व विधायक और अन्य मद में काटे गए टिकट के दस्तावेज खंगाले। इसके अलावा मांग पत्र, वे-बिल सहित अन्य दस्तावेजों की जांच की।
कथित 25 मांग पत्रों को जब्त कर साथ ले गए। साथ ही अब से संबंधित मदों के पात्र यात्रियों के टिकट मैनुअल काटने, वे-बिल की समरी को जांचने के निर्देश दिए। इसके अलावा जांच पूरी होने के बाद ईबीटीएम से इन नंबरों को हटवाने का आश्वासन भी दिया। इधर, एआरएम इंद्रासन ने बताया कि बुधवार को मुख्यालय से दो सदस्यीय टीम आई थी। इस संबंध में कर्मचारियों से पूछताछ करने के बाद कुछ दस्तावेज साथ ले गई है। बता दें कि इस तरह से टिकट काटे जाने का यह मामला एक डिपो का नहीं है, आला अफसर सभी डिपो में अधिकारियों को भेजकर जांच करा रहे हैं।
आखिर कैसे हो हो गई थी गडबड़ी
मार्च मेें परिवहन विभाग का सॉफ्टवेयर अपडेट किया गया था। ईबीटीएम में सांसद, विधायक, पूर्व विधायक सहित कई कोटे के नंबर को बदल दिया गया, लेकिन इससे परिचालक अनभिज्ञ थे। परिचालक मार्ग पर पुराने सॉफ्टवेयर के आधार पर कोटे वाले के टिकट काटते गए।
काशीपुर से हरिद्वार, रुद्रपुर, टनकपुर मार्ग पर चलने वाली बसों में ही करीब 131 टिकट काटे गए थे। मामला उजागर होने पर विभागीय अधिकारियों ने इन परिचालकों से सांसद मद में 5540 रुपये, विधायक में मद 44 रुपये, पूर्व विधायक मद में 683 रुपये और आर्मी वारंट मद में 464 रुपये की भरपाई करा ली है।
सांसद और अन्य कोटे में काटे टिकट के मामले की विभागीय जांच चल रही है। कुछ दस्तावेज साथ लिए गए हैं। रिपोर्ट मुख्यालय में आला अफसरों को सौंपी जाएगी।
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प्रदीप जैन, आईटी सेक्शन परिवहन निगम देहरादून।