खटीमा। राज्य जनजातीय शोध संस्थान की ओर से आयोजित तीन दिवसीय उत्तराखंड आदि रंगोत्सव का मंगलवार को समापन हो गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन विभिन्न राज्यों के जनजातीय कलाकारों ने सुंदर प्रस्तुतियों से समा बांध दिया।
खटीमा में तीन दिनों तक चले उत्तराखंड आदि रंगोत्सव 2026 ने जनजातीय संस्कृति, परंपरा और कला एक साझा मंच पर दिखी। उत्तराखंड के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश,हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, छतीसगढ़,महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिमी बंगाल, झारखंड, मिजोरम, उतर प्रदेश के जनजाति कलाकारों ने आयोजन को जीवंत बना दिया।
उत्तराखंड की थारू, बुक्सा, जौनसारी, भोटिया और राजी जनजातियों की सांस्कृतिक परंपराओं के साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने अपने लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक कलाओं के माध्यम से दर्शकों को भारत की जनजातीय विविधता से परिचित कराया। वहां पर मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या, समाज कल्याण सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अददांकी,नगर पालिकाध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, जनजाति कल्याण के उप निदेशक राजीव सोलंकी, नरेंद्र गंगवार,शुभम पटवा आदि थे।
हस्तशिल्प उत्पाद रहे आकर्षण का केंद्र
महोत्सव में हस्तशिल्प, हथकरघा, पारंपरिक कला, स्थानीय उत्पादों और खानपान के कई स्टॉल लगाए गए। स्टॉलों पर स्थानीय व्यंजनों, पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। स्टॉलों पर मंगलवार को दिनभर लोगों की भीड़भाड़ रही। लोगों ने खूब खरीदारी की।