रुद्रपुर। केसर इंटरप्राइजेज बहेड़ी की खुरपिया फार्म में स्थित बेशकीमती जमीन पर कब्जे का मामला मुख्यमंत्री दरबार पहुंच गया है। कंपनी के मुख्य संचालन अधिकारी ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन ने कंपनी का पक्ष सुने बगैर उनकी जमीन पर बलपूर्वक कब्जा करा दिया। आरोप है कि पुलिस अधिकारियों को सूचना देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में कंपनी के मुख्य संचालन अधिकारी शरत मिश्रा ने कहा है कि वर्ष 1934 में ग्राम खुरपिया में केसर शुगर वर्क्स (वर्तमान केसर इंटरप्राइजेज) को तत्कालीन सरकार ने जमीन आवंटित की थी। उस समय कंपनी के निदेशक छोटेलाल थे और 1956 में उनके निधन के बाद बेटे जीवन लाल निदेशक बने थे। जीवन ने अपना नाम बतौर प्रतिनिधि केसर शुगर वर्क्स के फार्म की भूमि दर्ज करने के लिए दिया था। इसे खाम ऑफिसर ने स्वीकार कर जीवन लाल का नाम बतौर प्रतिनिधि, केसर शुगर वर्क्स दर्ज कर लिया था। सीलिंग की कार्यवाही के बाद 21 जुलाई 2014 को केसर शुगर वर्क्स को मात्र 16.4800 हेक्टेयर जमीन दी गई। साथ ही 612.540 हेक्टेयर जमीन अतिरिक्त घोषित कर उत्तराखंड सरकार में निहित कर दी गई थी। कंपनी को दी गई जमीन कंपनी केा दी गई थी उस पर कानूनी रूप से कंपनी काबिज है। इस जमीन पर जीवन लाल और उसके वारिसान का निजी तौर पर कोई हक नहीं है। इसी बीच जीवन की बेटी पन्ना विनय शाह ने खुद को जीवन लाल का वारिस बताकर तहसील में जमीन खुद के नाम कराने के लिए आवेदन किया। तहसीलदार ने कंपनी को न सम्मन तामील कराया न ही सुनवाई का अवसर दिया। छह फरवरी 2020 को अनाधिकृत रूप से आदेश कर जमीन को महिला के नाम राजस्व अभिलेखों एवं खतौनी में दर्ज करा दिया। राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने के बाद महिला ने सिविल जज सीनियर डिविजन, रूद्रपुर की कोर्ट से तीन मार्च 2023 को निषेधाज्ञा प्राप्त की और उसके आधार पर 25 मार्च को पुलिस बल के साथ कंपनी की जमीन पर कब्जा कर लिया।
26 मार्च को भी पुलिस ने कंपनी के आवास, गोदाम और अन्य भवनों के ताले तोड़कर कब्जा कराया। इस दौरान तहसील, पुलिस कर्मियों ने कंपनी के अधिवक्ताओं को कोर्ट का आदेश भी नहीं दिखाया था। इस मामले में कंपनी की ओर से जिला जज न्यायालय में अपील लंबित है। तहसीदार को 11 मार्च को एकपक्षीय आदेश खत्म करने के लिए कंपनी की ओर से प्रार्थना पत्र दिया गया आरोप है कि तहसीलदार के जानबूझकर मामले को टालने के कारण आयुक्त नैनीताल के पास निगरानी दायर की गई है। 13 मार्च को जमीन पर कब्जे की आशंका पर डीएम, एसएसपी, किच्छा एसडीएम को सूचना दी गई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि डीएम और एसएसपी को उचित वैधानिक कार्यवाही करने के लिए आदेश दिए जाएं और कंपनी की जमीन पर हो रहे कब्जे की कार्यवाही को रोका जाए।