काशीपुर। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सब्जी उत्पादन कर रहे किसानों के लिए अच्छी खबर है। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय ने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष सब्जी उत्पादन मार्गदर्शिका जारी की है। इस गाइड में चार अलग-अलग कृषि-जलवायु जोनों के हिसाब से सब्जियों की 28 उन्नत प्रजातियों, बुवाई के समय, बीज दर, खाद और होने वाली आय की जानकारी दी गई है।
विश्वविद्यालय ने पर्वतीय उत्तराखंड को ऊंचाई के आधार पर चार जोनों में बांटा है। जोन-1 (365-914 मीटर) - भाबर और घाटी क्षेत्र जैसे काशीपुर, जसपुर, हल्द्वानी, कोटद्वार। जोन-2 (915-1523 मीटर) - रानीखेत, पिथौरागढ़, नैनीताल। जोन-3 (1524-2472 मीटर) - मुनस्यारी, चमोली, बेरीनाग। जोन-4 (2472 मीटर से ऊपर) - ऊंचे हिमालयी क्षेत्र हर सब्जी के लिए किस जोन में कब बुवाई करनी है।
सब्जियों की 28 उन्नत किस्मों से होगा लाभ
विवि के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनिल चंद्रा ने बताया कि सब्जियों की 28 उन्नत किस्मों को इस तरह चुना है कि हर जोन की सब्जी का स्वाद और गुणवत्ता अलग हो। जैसे ऊंचे पहाड़ की चेरी टमाटर और शिमला मिर्च का स्वाद मैदानी सब्जियों से बेहतर माना जाता है। इससे पहाड़ी सब्जियों को होटल, रेस्टोरेंट और ऑर्गेनिक बाजार में ब्रांड के रूप में बेचा जा सकेगा। वैज्ञानिक ने कहा कि जब किसान जोन के हिसाब से ब्रांडेड और जीआई टैग वाली किस्में उगाएंगे तो पहाड़ की सब्जी लोकल मंडी से निकलकर राष्ट्रीय बाजार तक अपनी पहचान बनाएगी और किसान की आय भी बढ़ेगी।
पॉलीहाउस और रोग-रोधी किस्मों पर जोर
गाइड में किसानों को पॉलीहाउस में खेती की भी सलाह दी गई है। पॉलीहाउस के लिए पंत पॉलीहाउस टमाटर-1 और 2 जैसी विशेष किस्में विकसित की गई हैं, जिनसे उत्पादन दोगुना हो जाता है। साथ ही पीला मोजेक रोधी भिंडी और जीवाणु झुलसा रोधी टमाटर जैसी रोग-प्रतिरोधी किस्मों की जानकारी भी दी गई है ताकि किसानों को दवाओं पर कम खर्च करना पड़े।