अपनी जगह दूसरे व्यक्ति को जेल भेजने वाले को जज ने 3 वर्ष के कारावास और 8 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि दूसरे व्यक्ति की जमानत लेने वालों को 2 वर्ष के कारावास की सजा सुनायी।
एपीओ परवेज आलम के अनुसार वर्ष 2012 में असलम पुत्र बुद्धा निवासी मोहल्ला चमरियान मस्जिद वार्ड 1 कैमरी जिला रामपुर यूपी एक मामले में वांछित चल रहा था। उसने अपने वकील व पुलिस के दरोगा के साथ साठगांठ करके अपने स्थान पर पड़ोसी रामप्रकाश पुत्र बुद्धी को 10 हजार रुपए देकर 29 सितंबर 2012 को जेल भिजवा दिया, करीब एक माह बाद वह जमानत पर छूट कर आया। इसी बीच जेल में बंद तहसीम उर्फ तस्लीम पुत्र नत्थू निवासी मोती मस्जिद के पास कैमरी ने उसे पहचान लिया और हल्द्वानी के जेलर मनोज कुमार आर्य को बता दिया।
जिस पर जेलर द्वारा उससे पूछताछ की तो उसने सारी बात बता दी, जिसके बाद जेलर द्वारा असलम बने रामप्रकाश एवं असली असलम के विरुद्ध प्रार्थना पत्र दिया तो उन दोनों एवं जमानत लेने वाले लम्बाखेडा थाना रूद्रपुर निवासी अमीर हुसैन पुत्र कल्लन व उमर हसन पुत्र मेहन्दी हसन के विरुद्ध मुकदमा कायम किया गया।
मामला प्रथम अपर सिविल जज प्रवर खंड राहुल कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में चला। इसमें सरकारी वकील नरेन्द्र नाथ पाण्डेय व परवेज आलम द्वारा 5 गवाह पेशकर आरोप सिद्ध कर दिया गया। रामप्रकाश 24 सितंबर 2014 के बाद से कोर्ट से गैरहाजिर हो गया तो उसकी पत्रावली अलग कर दी गयी।
जज राहुल कुमार श्रीवास्तव ने असलम को आपराधिक षडयंत्र व छल करने का अपराधी मानते हुए तीन वर्ष के कारावास व आठ हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनायी जबकि गलत व्यक्ति की जमानत लेने का आरोपी मानते हुए अमीर हुसैन व उमर हसन को दो-दो वर्ष के कारावास की सजा सुनायी।