काशीपुर में तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते आईएमए के पदाधिकारी।
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काशीपुर/खटीमा। डॉक्टरों पर लगातार बढ़ रहे हमलों के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। ज्ञापन में डाक्टरों की सुरक्षा के लिए प्रभावी रूप से सेंट्रल सुरक्षा एक्ट बनाए जाने की मांग की है। इधर, खटीमा में स्थानीय आईएमए शाखा ने प्रोटेस्ट डे मनाते हुए तीन सूत्री मांगों के लिए काले फीते बांधकर विरोध जताया।
शुक्रवार को आईएमए के पदाधिकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष डा. अरविंद शर्मा के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार बीसी पंत को दिया। ज्ञापन में कहा गया है कि डाक्टरों पर हो रहे हमलों के विरोध में केंद्रीय अध्यक्ष की अपील पर उत्तराखंड के सभी डाक्टर विरोध दिवस मना रहे हैं। कोरोना कॉल में डाक्टरों ने जान पर खेलकर महामारी को नियंत्रित किया। बावजूद इसके अस्पतालों में तोड़फोड़ और डाक्टरों के साथ मारपीट की घटनायें आम रहीं। ज्ञापन में एलोपैथ को लेकर गलत बयानी करने और एलोपैथिक डाक्टरों को हतोत्साहित करने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि डाक्टरों की सुरक्षा के लिए हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स सुरक्षा अधिनियम को प्रभावी करते हुए गैर जमानती घोषित किया जाए। डॉक्टरों पर हमला करने वाले आरोपियों के खिलाफ सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाए। वहां पर आईएमए के शाखा अध्यक्ष डॉ. एसके अग्रवाल, सचिव डॉ. अरुण जैन और डॉ. रजत गुप्ता आदि थे। इधर, खटीमा में आईएमए संस्था अध्यक्ष उमेश सुंदास ने कहा कि कोविड महामारी में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद डॉक्टर अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके बाद भी डॉक्टरों पर हमले होना चिंतनीय है। काले फीते बांधकर विरोध करने वालों में डॉ. राजेश गंगवार, डॉ. पीसी पांडे, डॉ. दीपक मारवाह, डॉ. सुनील जोशी, डॉ. कुमार संभव, डॉ. अजय चौधरी, डॉ. रचित सक्सेेना आदि थे।