किसान मेले की शुरुआत 1965 में हुई थी। आज यह किसानों की पहली पसंद बना हुआ है। 51 साल में लाखों किसानों ने मेले से फायदा उठाया। कई की जिंदगी में किसान मेले ने रोशनी भर दी। अमर उजाला ने कई साल से किसान मेले आ रहे लोगों से बातचीत की तो उनसे जुड़े रोचक पहलू सामने आए।
बदल गई आर्थिक स्थिति
जीवन के साठ बसंत देख चुके बुलंदशहर के मुनंद पाल सिंह ने बताया कि वह 14 वर्ष की उम्र में पहली बार किसान मेला अपने पिताजी के साथ आये थे। उसके बाद मेले में हर साल आने का सिलसिला जारी है। मुनंद पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि तब फसल की पैदावर कम हो रही थी जिससे उनके पिताजी को किसी ने किसान मेले के बारे में बताया। यहां के बीज से खेती की पैदावार बढ़ गई और जल्द ही उनके घर की आर्थिक स्थिति बदल गई है।
कम दाम में होता है ज्यादा फायदा
2- शाहजहांपुर से आये नरेश कुमार ने बताया कि वह पिछले पांच साल से किसान मेले में आ रहे हैं। नरेश ने बताया कि पिछली बार की तुलना में इस बार बीज और भी सस्ता है। यहां का बीज सस्ता और गुणवत्ता युक्त होता है। यही कारण है कि वह पिछले पांच साल से मेले में मटर और गेंहूं का बीज खरीदने आ रहे हैं।
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फसल के मिलते हैं अच्छे दाम
बरेली से पहुंचे साठ वर्ष के खेम सिंह ने बताया कि वह पिछले 15 साल से किसान मेले आ रहे हैं। सिंह के अनुसार यहां का बीज दाम में तो कम होता है ही, साथ ही इस बीज से होने वाली उपज भी अधिक मात्रा में पैदा होती है। यही कारण है फसल पकने के बाद आढ़ती उनक ी फसल के अच्छे दाम देने को तैयार हो जाते हैं।
मिलती है काफी जानकारी
62 वर्ष के विजय पाल बताते हैं कि वह पिछले 18 साल से नियमित किसान मेले में आ रहे हैं। पाल बताते हैं यहां सबसे जो महत्वपूर्ण चीज सीखने को मिलती है वह यह है कि यहां हर फसल के बारे में अधिकारियों द्वारा जानकारी मिल जाती है, जिससे फसल लगाते हुए काफी फायदा मिलता है।