डीआरडीओ के अंतर्गत रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (डिबेर) ने हाइड्रोपोनिक (मृदा रहित) तकनीक से चारा उगाने का नया तरीका ईजाद किया है। इससे बीज अंकुरित होने के सात से दस दिन में 15 से 25 सेमी ऊंचा चारा तैयार हो सकता है।
पंतनगर मेले में आए संस्थान के तकनीकी अधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि सामान्यत: पेड़-पौधे जमीन पर ही उगाते हैं। हाईड्रोपानिक तकनीक में सिर्फ पानी, पोषक तत्व और सूर्य के प्रकाश से पशुपालक विपरीत जलवायु वाले क्षेत्रों में हर माह ट्रे में हाइड्रोपोनिक तकनीक से हरा चारा उगा सकते हैं। इससे पानी की बचत होगी। तीन हजार वर्ग फुट में प्रतिदिन एक हजार किग्रा हरे चारा उगेगा। मजदूरी खर्च कम होने के साथ पोषकता बढ़ेगी। उगे चारे में 85 फीसदी सुपाचकता और 14 फीसदी कच्चा प्रोटीन होगा और दुग्ध उत्पादन भी बढ़ेगा। इस चारे में कोई भी कीटनाशक का प्रयोग नहीं होता। पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं।
चारा उगाने की विधि
ग्रीनहाउस व ट्रे के लिए रैक को बांस से तैयार करें। नैपसैक स्पेयर से सिंचाई की जा सकती है। अनाज में नमी की मात्रा लगभग 14 फीसदी व जमाव 90 फीसदी और बीज खरपतवार, कीट, रोग व धूल-कचरा रहित हो। जौ, जई, ज्वार, बाजरा, गेहूं, मक्का व लोबिया जैसी फसलों को आसानी से उगाया जा सकता है।
बीज अंकुरित करने का तरीका
अनाज धोने के बाद पानी में डुबोएं। बीज को एक निश्चित समय (आठ से 16 घंटे तक) के लिए भिगोना चाहिए। भीगे बीज को जूट के बोरे में अंकुरित करें। जिसका तापमान 21-30 डिग्री सेल्सियस हो। इसके बाद हाईड्रोपोनिक ट्रे में एक समान बिछाएं। ट्रे में छेद होने चाहिए। हर तीन से चार घंटे में पानी का छिड़काव करें। कुछ समय बाद बढ़ रही हरी पत्ती, जड़ व बीजांस अंकुर चटाई का रूप ले लेंगी। जो ऊपर से हरे और नीचे से सफेद दिखेगा। इस तरह सात से दस दिनों में चारा तैयार हो जाएगा।