रुद्रपुर में नवल और आरती ने अपनी शादी की 14वीं सालगिरह को यादगार बनाने की पूरी तैयारी की थी। उनके बच्चों में भी उत्साह था लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। मंदिर में खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए पूजा कर खुशी-खुशी घर लाैट रहे दंपती का साथ हादसे से टूट गया। आरती के जीवन की लाै बुझने से परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं।
मूलरूप से बरेली (यूपी) के देवचौरा थाना भमौरा निवासी नवल गुप्ता पत्नी आरती और दो बेटों के साथ दो साल से रंपुरा में किराये के मकान में रह रहे थे। सिडकुल में नौकरी कर रहे नवल का परिवार हंसी-खुशी जीवन की गाड़ी आगे बढ़ा रहा था। रविवार को दोनों ने तय किया था कि दिन की शुरुआत अटरिया मां के आशीर्वाद से करेंगे।
तय कार्यक्रम के तहत दोनों रविवार सुबह मंदिर पहुंचे। पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करने के बाद घर लौट रहे थे। घर से केवल एक किमी पहले रोडवेज बस अड्डे के पास काल बनकर आए डंपर ने आरती को कुचल दिया। बाइक चला रहे नवल को अंदरूनी चोटें आईं हैं। सूचना पर पड़ोसियों के साथ दंपती के दोनों बच्चे नक्ष (12) और युवराज (10) भी मोर्चरी पहुंच गए। दोनों पिता से लिपटकर जार-जार रोने लगे। तीनों को रोता देख हर किसी की आंखें नम हो गई। हर कोई नियति को कोसने लगा। नक्ष नगर के निजी स्कूल में कक्षा सात में तो युवराज कक्षा छह में पढ़ता है।
बरेली से पहुंचे परिजन और रिश्तेदार
पांच दिन पहले ही खोली थी दुकान
कपड़ों की सिलाई की हुनरमंद आरती पति को आर्थिक मदद करना चाहती थी। उसने पांच दिन पहले 23 अप्रैल को रंपुरा में किराये का कमरा लेकर सिलाई की दुकान खोली थी। ग्राहक भी आने लगे थे। आरती परिवार की आर्थिकी मजबूत कर पाती, इससे पहले खुद ही दुनिया से रुखसत हो गई।
पति ने छह दिन पहले बदली थी नौकरी
अब रुद्रपुर में नहीं रहना चाहता नवल
मोर्चरी पहुंचे नवल गुप्ता के पिता राधेश्याम गुप्ता बार-बार कह रहे थे कि वह शुरू से नवल के रुद्रपुर आने के खिलाफ थे। जबसे नवल बच्चों के साथ रुद्रपुर आया, वह लगातार उस पर लौटने का दबाव डाल रहे थे। हाल में भी उन्होंने बच्चों समेत घर लौटने के लिए कहा था। बताया कि पहले नवल उनके साथ ही देवचौरा की अनाज मंडी में काम करता था। वह चाहते थे कि नवल फिर से वहीं काम करे, लेकिन वह नहीं माना। नवल गुप्ता का कहना है कि अब वह रुद्रपुर नहीं रहना चाहता। बच्चों के साथ घर लौट जाएगा।