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सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद, फिर भी सर्वे नहीं

Tue, 26 Sep 2017 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो काशीपुर।
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काशीपुर में गन्ने की गिरी हुई फसल। - फोटो : amar ujala
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बारिश से काशीपुर तहसील क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ धान और गेहूं की फसल नष्ट हो गई। किसानों में जागरूकता न होने से फसल बीमा कराने वाले 1300 किसानों में से मात्र 60 किसानों ने ही जिला सहकारी बैंक में शिकायत की है। हैरत है कि राजस्व विभाग ने आपदाग्रस्त घोषित करने के लिए फसल के नुकसान का सर्वे भी शुरू नहीं किया, जबकि बीमा कंपनी ने रिपोर्ट मांगी है। शनिवार से तीन दिन तक हुई बारिश से खेतों में पानी भरने से सैकड़ों एकड़ धान और गन्ने की फसल गिर गई, जबकि धान की फसल पक कर कटने के लिए तैयार है। पकी हुई फसल पानी में गिरने से धान की बालियां खराब हो जाती हैं। भारी नुकसान के बाद भी राजस्व विभाग ने आपदा ग्रस्त घोषित करने के लिए सोमवार तक सर्वे शुरू नहीं किया गया है। लगभग सभी किसानों ने बैंकों व सहकारी समितियों से कृषि ऋण लिया हुआ है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में एग्रीकल्चर इंश्योरेंश कंपनी ऑफ इंडिया ने बैंकों से ऋण लेने वाले किसानों के खाते से किस्त की रकम निकाल ली है। सूत्रों ने बताया कि काशीपुर तहसील में फसलों के भारी नुकसान से बीमा कंपनी के अधिकारी चिंतित है। बीमा कंपनी के अधिकारियों ने चुपचाप नुकसान का जायजा ले लिया है। उधर, किसान यूनियन के महामंत्री बलजिंदर सिंह संधु ने प्रशासन से जिला ऊधमसिंह नगर को आपदाग्रस्त घोषित कर फसलों के नुकसान का क्लेम देने की मांग की है, अन्यथा किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
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आवेदकों की भेजी रिपोर्ट जिला सहकारी बैंक काशीपुर के प्रबंधक रोहित कुमार ने बताया कि काशीपुर तहसील में धान व गन्ना की फसल काफी खराब हो गई है, लेकिन अभी तक केवल 60 किसानों ने लिखित शिकायत की है, जिसकी बीमा कंपनी को मेल भेज दिया है। बीमा कंपनी के अधिकारियों को नुकसान की जानकारी है। बीमा कंपनी ने मांगी सर्वे रिपोर्ट एसडीएम विनीत तोमर ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों की फसल का बीमा करने वाली बीमा कंपनी एग्रीकल्चर इंश्योरेंश कंपनी ऑफ इंडिया ने काशीपुर तहसील क्षेत्र में फसलों के नुकसान के संबंध में जानकारी मांगी है। जानकारी देने के लिए नुकसान का सर्वे करने का आदेश दिया जा चुका है।
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नहीं पहुंचे जनप्रतिनिधि किसानों का आरोप है कि वोटों के लिए गांवों में धूल फांकने वाले जिले के किसी विधायक, राजनैतिक दल के नेता ने गांवों में जाकर किसानों का नुकसान देखने की जहमत नहीं उठाई। नेताओं ने सरकार से किसानों को फसल बीमा का क्लेम देने की मांग नहीं की है।
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