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पड़ताल: सड़कों पर लावारिस पहरा थाम रहा रफ्तार...ले रहा जान, जगह-जगह पशुओं के झुंड बन रहे जाम का कारण

Tue, 18 Aug 2026 12:01 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर

सार

पंतनगर में लावारिस पशु से टकराने के बाद कांस्टेबल की मौत हो गई, लेकिन इसके बावजूद शहर में बेसहारा पशुओं की समस्या जस की तस बनी हुई है। सड़कों पर घूमते पशु अब हादसों का खतरा पैदा करने के साथ ही यातायात व्यवस्था के लिए मुसीबत बन गए हैं।
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रुद्रपुर के किच्छा रोड पर थार के आगे बैठा लावारिस पशु। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंतनगर में लावारिस पशु से टकराने के बाद कांस्टेबल भुवन चंद्र आर्या की मौत के बावजूद शहर में बेसहारा पशुओं की समस्या जस की तस है। सड़क पर घूमते और बैठे पशु अब हादसों के खतरे के साथ ही यातायात व्यवस्था के लिए भी परेशानी बन रहे हैं। व्यस्त मार्गों पर इनके कारण दिन में कई बार यातायात धीमा पड़ने से जाम की स्थिति बन रही है।

सोमवार को संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में सिडकुल ढाल, किच्छा रोड, काशीपुर रोड, सिडकुल कट और पंतनगर रोड समेत कई स्थानों पर पशु सड़क के बीच या किनारे बैठे और घूमते मिले। अचानक सामने आए पशुओं से बचने के लिए वाहन चालकों को ब्रेक लगाने या लेन बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। पीछे से आ रहे वाहनों की रफ्तार थमने और दोनों ओर से वाहनों के आने पर कई जगह यातायात धीमा हो गया।

कई स्थानों पर वाहन चालक खुद उतरकर पशुओं को सड़क से हटाते नजर आए। व्यस्त मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क पर बैठे पशु परेशानी और बढ़ा रहे हैं। दिन में कई जगह पशुओं के झुंड सड़क किनारे या बीच मार्ग में दिखाई देते हैं।

कूड़े के कारण सड़क तक पहुंच रहे पशु

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जहां खुले में खाद्य कचरा मिल रहा है, वहां बेसहारा पशुओं का जमावड़ा भी बढ़ रहा है। बाजार और आबादी वाले इलाकों में सड़क किनारे पड़ा कूड़ा इन्हें आकर्षित करता है। ऐसे में पशुओं को पकड़ने के साथ खुले में कूड़ा डालने पर रोक और बेहतर कूड़ा प्रबंधन भी जरूरी है।

हॉर्न से नहीं, स्थायी व्यवस्था से मिलेगी राहत
वाहन चालक लगातार हॉर्न बजाने के बावजूद कई बार पशुओं को सड़क से नहीं हटा पाते और उन्हें खुद उतरकर किनारे करना पड़ता है। इससे साफ है कि समस्या का समाधान केवल मौके पर पशु हटाने से नहीं होगा। नियमित अभियान चलाकर पशुओं को पकड़ने, निगरानी रखने और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था करने की जरूरत है।

 

हमारी गोशाला बनकर तैयार हो गई है। लावारिस पशुओं को शहर से पकड़कर गोशाला भेजने का काम किया जा रहा है। नगर निगम क्षेत्र में जल्द पशुओं से राहत मिलेगी। - विकास शर्मा, मेयर, रुद्रपुर

45 बीघा में 6.50 करोड़ लागत से गोशाला तैयार, 2000 पशु रह सकेंगे

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लम्बाखेड़ा गांव में कुमाऊं की सबसे बड़ी आधुनिक गोशाला बनकर तैयार हो गई है। लगभग 45 बीघा भूमि पर 6.50 करोड़ की लागत से निर्मित इस विशाल गोशाला में बिना खूंटे के लगभग 2,000 गोवंशों को एक साथ सुरक्षित रखा जा सकेगा। गोशाला में पशुओं के लिए खुले शेड, पीने के पानी की स्वचालित व्यवस्था, चारा रखने के लिए भंडार गृह, बीमार पशुओं के उपचार के लिए चिकित्सालय और डॉक्टरों के रहने की सुविधा उपलब्ध है। जिला प्रशासन का कहना है कि सड़कों और हाईवे पर घूम रहे लावारिस गोवंश के कारण आए दिन हादसे होते थे। इस गोशाला में रुद्रपुर, किच्छा, गदरपुर और आसपास के क्षेत्रों के लावारिस पशुओं को लाकर रखा जा रहा है। अब तक 200 पशु यहां रखे जा चुके हैं।

रेडियम बेल्ट बांधने से कम हुए थे हादसे
रुद्रपुर में कुछ समय पहले लावारिस पशुओं के गले में रेडियम बेल्ट बांधने का अभियान स्थानीय सामाजिक संस्था सारथी फाउंडेशन की ओर चलाया गया था लेकिन अब यह ठंडे बस्ते में चला गया है। अगर पशुओं के गले में रेडियम बेल्ट हो तो रात को सड़क पर वह आसानी से दिख सकेंगे। अंधेरे में अक्सर पशु सड़क पर नजर नहीं आते। नगर निगम को भी इस ओर पहल करने की जरूरत है।

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