प्रदेश हेपेटाइटिस सी के मामले हेपेटाइटिस बी की तुलना में दस गुना अधिक हैं। रुद्रपुर जैसे शहर और आसपास में ही प्रतिमाह 70 से 80 मामले सामने आ रहे हैं, इनमें स्त्री और पुरुष दोनों ही शामिल हैं।
हेपेटाइटिस सी खून से होने वाला संक्रमण है। देश के ज्यादातर संक्रमित इलाकों में इसकी वजह खून के लेन-देन के समय बरती गई असावधानी, प्रयोग की जा चुकी सुइयों को दोबारा इस्तेमाल, सर्जिकल प्रक्रियाओं में असावधानी, उपकरणों का साफ न किया जाना, टूथब्रश और रेजर जैसे निजी संसाधनों का एक-दूसरे में बांटा जाना और असुरक्षित सेक्स संबंध है।
गौरतलब यह है कि अभी तक हेपेटाइटिस सी के लिए कोई वैक्सीन ईजाद नहीं की जा सकी है, जिसकी वजह से पीड़ित व्यक्ति को क्रोनिक लीवर रोग के अलावा लीवर कैंसर तक हो सकता है। चिंता का विषय यह है कि जिस तेजी से रुद्रपुर और आसपास के क्षेत्रों में हेपेटाइटिस सी के मामले लगातार बढ़ते हुए आ रहे हैं वह आने वाले समय में बड़ी चिंता का विषय है।
इसलिए दिशा में जल्द से जल्द कुछ बड़े कदम उठाने होंगे। वरना वर्तमान में जो स्थिति रुद्रपुर में हेपेटाइटिस सी सामने आ रहा है वह बड़ी चुनौती है।
हेपेटाइटिस सी को साइलेंट किलर माना जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बिलकुल भी स्पष्ट नहीं होते हैं। इसकी वजह से जल्दी समझ नहीं आता कि कोई इससे संक्रमित है। काफी समय तक इसकी जांच न हो पाने के कारण यह धीरे-धीरे क्रोनिक एचसीवी संक्रमण के तौर पर विकसित होता जाता है।
रुद्रपुर में हर माह 70 से 80 केस हेपेटाइटिस सी सामने आ रहे हैं। जागरूकता न होने की वजह से इसमें इजाफा हो रहा है।
- डा. किशोर, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट एमडी किशोर अस्पताल रुद्रपुर
जिस तेजी के साथ तराई में हेपेटाइटिस सी के मामले सामने आ रहे हैं वह वास्तव में चिंता का विषय है। इसमें सबसे पहले जागरूकता का अभाव है। समय-समय पर शिविर लगाए जाने की जरूरत है। हेपेटाइटिस सी संक्रमित सुई के दोबारा इस्तेमाल से तेजी से फैलता है। सुई से नशा करने वालों में यह अधिक देखा गया है।
-डा. रणजीत सिंह गिल, एमडी अमृत अस्पताल