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निजी डॉक्टरों की हड़ताल से सरकारी अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़

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रुद्रपुर जिला अस्पताल में ओपीडी पंजीकरण के लिए लगी भीड़। - फोटो : RUDRAPUR
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आयुर्वेद डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति मिलने के निर्णय के विरोध में शुक्रवार को रुद्रपुर में निजी अस्पतालों की ओपीडी बंद रही जबकि इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाएं और आईपीडी जारी रही। निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद रहने से सरकारी अस्पतालों में अचानक मरीजों की भीड़ बढ़ गई। रुद्रपुर जिला अस्पताल में अन्य दिनों की अपेक्षा करीब 40 प्रतिशत अधिक ओपीडी हुई।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर रुद्रपुर में सुबह छह बजे से निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद कर दी गई। अधिकांश निजी अस्पतालों में विभिन्न जाचों के लिए पहुंचे मरीजों व तीमारदारों को बगैर जांच लौटना पड़ा है। हड़ताल से जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ी गई। जिला अस्पताल में सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक ओपीडी में मरीजों की भीड़ रही। ओपीडी पंजीकरण काउंटर पर मरीजों की भीड़ के चलते सामाजिक दूरी के नियमों की धज्जियां उड़ गईं। दिनभर में करीब बारह सौ से अधिक ओपीडी हुई। जबकि वर्तमान में सामान्य दिनों में जिला अस्पताल की ओपीडी सात से आठ सौ के बीच होती है।
शाम छह बजे निजी अस्पतालों में ओपीडी शुरू हुई। जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस सामंत ने कहा कि निजी डॉक्टरों की हड़ताल के कारण अचानक मरीजों की संख्या बढ़ गई थी। निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद होने के कारण अधिकांश मरीज जिला अस्पताल व अन्य सरकारी अस्पतालों में पहुंचे।
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सर्जरी की अनुमति देना स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ : आईएमए
रुद्रपुर। शुक्रवार को रुद्रपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में आईएमए की रुद्रपुर शाखा के अध्यक्ष डॉ. अजय अग्रवाल और सचिव डॉ. मंदीप सिंह ने कहा कि आईएमए मिक्सौपैथी का विरोध करता है। उन्होंने कहा आयुर्वेद के डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति देना गलत है। यह तरह से आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ की तरह है। दो पैथियों को एक में मिला देने से खतरा बढ़ जायेगा। उन्होंने कहा कि सर्जरी सिर्फ सर्जन ही कर सकता है।
सरकार को चाहिए कि आयुर्वेदिक डॉक्टरों को आयुर्वेद में और एलोपैथिक डॉक्टरों को एलोपैथ में विशेषज्ञता हासिल कराए। यदि आयुर्वेद के डॉक्टर सर्जरी करेंगे तो इसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ निजी डॉक्टरों ने सुबह छह से शाम छह बजे तक ओपीडी बंदी रखी गई। अब रणनीति के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के दिशानिर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।
कुछ निजी अस्पतालों में जारी रही ओपीडी
रुद्रपुर। डॉक्टरों की हड़ताल के दौरान रुद्रपुर में कुछ निजी अस्पतालों में ओपीडी भी होती रही। कुछ डॉक्टर इमरजेंसी सेवा के नाम पर मरीजों की जांच करते दिखे। हालांकि इस तरह के निजी अस्पतालों की संख्या काफी कम रही।
आयुुर्वेद डॉक्टरों ने मरीजों से नहीं ली पर्चे की फीस
रुद्रपुर। केंद्र सरकार के आयुर्वेद छात्रों को सर्जरी की अनुमति मिलने के फैसले का रुद्रपुर के आयुर्वेद डॉक्टरों ने समर्थन किया। सरकार के निर्णय का समर्थन करते हुए शुक्रवार को कई आयुर्वेद डॉक्टरों ने अपने मरीजों से नया पर्चा बनवाने की फीस नहीं ली।
आयुर्वेदिक डॉक्टर अशोक कुमार मित्रा ने कहा कि आयुर्वेद छात्रों को सर्जरी की अनुमति देना केंद्र सरकार का सही निर्णय है। सरकार के इस फैसले को समर्थन देते हुए उन्होंने अपने मरीजों से नया पर्चा बनवाने की फीस नहीं ली थी। मरीजों से सिर्फ दवाइयों के ही पैसे लिए।
उन्होंने कहा कि सरकार के इस निर्णय से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सुधार आ सकता है। डॉ. एसके राजशाही ने कहा कि देश में एमबीबीएस की पढ़ाई इतनी महंगी है कि कई गरीब परिवारों के बच्चे नीट में उत्तीर्ण होने के बावजूद फीस नहीं भर पाते हैं। कई छात्र-छात्राओं को नीट पास करने के बावजूद बीएएमस व बीएचएमएस करना पड़ता है। ऐसे में सरकार का यह फैसला सराहनीय है। उन्होंने कहा कि भारत में आयुर्वेद ही चिकित्सा सेेवा का जनक है। ऐसे में यदि आयुर्वेद डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति मिलती है तो इसमें क्या गलत है। यह एकदम उचित है।
काशीपुर में भी डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार किया ा काशीपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर शुक्रवार को निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार किया। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान सभी डॉक्टरों ने आईएमए भवन पर एकत्र होकर अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।
आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी का अधिकार देने का निर्णय के विरोध में आईएमए से जुड़े सभी निजी डॉक्टरों ने सुबह 6 से शाम 6 बजे तक ओपीडी का बहिष्कार किया। इस दौरान आपात और कोविड सेवाएं सुचारु रहीं। आईएमए भवन पर हुई डाक्टरों की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले से देश में मिक्चर पैथी को बढ़ावा मिलेगा। अनुभवहीन लोगों के प्रैक्टिस में आने से लोगों का जीवन से खतरे में पड़ गया है।
वहां डॉ. एसके अग्रवाल, डॉ. अरुण जैन, डॉ. एके सिरोही, डॉ. यशपाल रावत, डॉ. बीना जोशी, डॉ. पारूल, डॉ. नक्षत्र, डॉ. बीएम गोयल, डॉ. एके गोयल, डॉ. मंसा, डॉ. बीसी जोशी, डॉ. रवि सहोता, डॉ. एसपी गुप्ता, डॉ. रवि सिंघल, डॉ. नरेश मेहरोत्रा, डॉ. डीके अग्रवाल, डॉ. गुरपाल सहोता,डॉ. अनुराग वर्मा, डॉ. एके लुंबा थे। वहीं इंडियन डेंटल एसोसिएशन (आईडीए) की काशीपुर शाखा से जुड़े डॉक्टरों ने आयुष चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति दिए जाने का विरोध किया। वहां डॉ. आलोक टंडन, डॉ. निकेत मेहरोत्रा, डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. शशांक नागर, डॉ. अंकित जिंदल, डॉ. मणि जिंदल, डॉ. अमनदीप सोडी, डॉ. सुधीर आदि थे।
खटीमा में भी मेडिकल सेवाएं रखी बंद
खटीमा। आईएमए की स्थानीय शाखा ने देशव्यापी आंदोलन के समर्थन में इमरजेंसी सेवा छोड़कर अन्य मेडिकल सेवाएं बंद रखी। ओपीडी बंद होने से मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। विरोध करने वालों में आईएमए शाखा अध्यक्ष डॉ. उमेश सुंदा, डॉ. चंद्रशेखर जोशी, डॉ. पीसी पांडे, डॉ. प्रशांत अग्रवाल, डॉ. अजय चौधरी, डॉ. प्रेम सिंह, डॉ. आनंद मोहन रतूड़ी, डॉ. आरिफ खान, डॉ. जीसी पांडे, डॉ. विवेक अग्रवाल, डॉ. लता जोशी, डॉ. रेनू सिंह आदि थे। संवाद
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