रुद्रपुर। नशीले पदार्थों का सेवन, अनियमित खानपान और बदलती जीवन शैली सेहत पर भारी पड़ रही हैं और कैंसर जैसी भयावह बीमारी को जन्म दे रही है। तराई के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में कैंसर जड़ें जमा रहा है। एक निजी अस्पताल में ही तीन सालों में सिर्फ ऊधमसिंह नगर से कैंसर ग्रसित 590 मरीज इलाज करने के लिए पहुंचे जबकि नैनीताल, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा से आने वाले मरीजों की संख्या 479 थी। इनमें सबके अधिक मरीज स्तन कैंसर, गले और फेफड़े के कैंसर से ग्रसित था। डाॅक्टर के अनुसार अगर शरीर में किसी तरह का बदलाव आने से दिक्कतें हो रही हैं तो उसके अनदेेखा करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
- कैंसर का फैलाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रुद्रपुर के एक निजी अस्पताल में ही तीन साल में कुमाऊं के चार जिलों से 1,069 मरीज इलाज कराने पहुंच चुके हैं। ऊधमसिंह नगर से सटे रामपुर, मुरादाबाद और बरेली जिले के क्षेत्रों से 372 मरीज पहुंचे हैं।
- सबसे अधिक 30 से 35 फीसदी मरीज स्तन कैंसर और 25 से 30 फीसदी मरीज गले व मुंह के कैंसर के आए हैं। बताया कि लोग शराब, गुटका, तंबाकू, रसायन युक्त खाद्य पदार्थ और पानी का सेवन कैंसर को आमंत्रित करता है। आठ से दस फीसदी मामले जैनेटिक भी होते हैं। कैंसर के पहली और दूसरे स्टेज में रिकवरी रेट सबसे अच्छा होता है।
ये हैं लक्षण
- स्तन में गांठ या सूजन, पानी रिसना, बांह में गांठ
- आवाज में अचानक बदलाव
- सांस फूलना, छाती में दर्द होना
- मुंह में हुए छाले ठीक नहीं होना
- गले में खाना फंसना
- शरीर में किसी भी हिस्से में लगातार सूजन बनी रहना
- बांह या अन्य जगहों पर गांठ का बढ़ना
- बच्चेदानी से खून या गंदा पानी आना
- पेशाब या मल में खून आना
सेहत को लेकर लापरवाही से उपज रहा कैंसर
रुद्रपुर। पर्वतीय क्षेत्रों से कैंसर के इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। 2020 में नैनीताल, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा से इलाज कराने के लिए 134 मरीज आए थे जबकि 2022 में संख्या 169 हो गई थी। ऊधमसिंह नगर जिले से 2020 में मरीजों की संख्या 176 थी जो 2022 में 197 हो गई थी।
- कैंसर से बचने के लिए नियमित व्यायाम करने के साथ ही तंबाकू, शराब और धूम्रपान से दूरी बनाएं। अपनी दिनचर्या को नियमित रखे और शरीर में किसी तरह के बदलाव या दिक्कतों को नजरअंदाज करने के बजाए डाक्टर को दिखाएं। कैमिकल, लोहे, ग्लास के कारखानों में काम करने वाले को नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए। जंक फूड से भी बचने की आवश्यकता है। - डॉ. योगेंद्र सिंह भाकुनी, कैंसर सर्जन