रुद्रपुर। 21 लाख से अधिक आबादी वाले जिले में आधी आबादी के लिए अलग से अस्पताल नहीं है। जबकि सूबे के छोटे-छोटे जिलों में भी महिलाओं को पृथक से अस्पताल की सुविधा मिल रही है।
जिले की महिलाएं सामान्य अस्पतालों में इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। अलग से अस्पताल नहीं होने से महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। महिला अस्पताल में अलग से महिला स्टाफ की तैनाती रहती है। महिला स्टाफ होने से महिलाओं को सहूलियत होती है। सामान्य अस्पतालों में इलाज कराने में महिलाएं झिझक महसूस करती हैं। जिले में महिला अस्पताल की मांग को लेकर महिलाएं मुखर हैं। कभी-कभी पृथक अस्पताल की मांग उठती रही है लेकिन यह मांग दरकिनार होती चली आ रही है।
जिले की आबादी में आधा हिस्सा महिलाओं का है। इसके बावजूद शासक वर्ग इस गंभीर विषय पर संवेदनशील नहीं दिखाई देते हैं। अलग से अस्पताल के मामले में महिलाओं की आवाज शासक वर्ग तक नहीं पहुंच पा रही रही है।
महिलाओं के लिए अलग से अस्पताल होना चाहिए। महिलाओं को सामान्य अस्पताल में इलाज कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
-हीरा जंगपांगी, संयोजक महिला कल्याण समिति दिनेशपुर-फोटो07पी
जिले में महिला अस्पताल होना बेहद जरूरी है। अलग से अस्पताल न होने का खामियाजा महिलाओं को भुगतना पड़ता है। निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
-लता रावत-सामाजिक कार्यकर्ता गूलरभोज