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रोगमुक्त चने की तीन किस्में विकसित

Thu, 06 Aug 2015 12:31 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, पंतनगर।
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 फसलों की नई नई प्रजातियों के विकास के क्रम में पंतनगर विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों को चने की अधिक उत्पादन वाली और रोगों से मुक्त तीन प्रजातियों के विकास में सफलता मिली है।
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चने की नव विकसित तीनों प्रजातियों पंत चना-3, पंत चना-4, पंत काबुली चना-2 को उत्तराखंड राज्य प्रजाति विमोचन समिति द्वारा उत्तराखंड राज्य में उगाए जाने के लिए विमोचित कर दिया है।

पहले किसानों द्वारा चने की उगाई जा रही विभिन्न प्रजातियां कई प्रकार के रोगों एवं कीटों से ग्रसित हो गई थीं। इस वजह से चने की उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा था।
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रोगों एवं कीटों की रोकथाम करने में उत्पादन लागत भी ज्यादा लग रही थी। जिससे किसानों की आय में निरंतर कमी होती जा रही थी। इसलिए किसान चना उत्पादन से विमुख होते जा रहे थे।

इन परिस्थितियों में चना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय द्वारा विगत में रोग एवं कीट अवरोधी, अधिक उपज देने वाली चने की प्रजातियों के विकास हेतु शोध कार्य शुरू किये गये।

जिसके परिणाम स्वरूप अधिक उत्पादकता वाली रोगरोधी प्रजातियां विकसित की जा सकीं। पंत चना-3: उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में तीन वर्षों तक किये गये प्रजाति परीक्षणों में पंत चना-3 की औसत उपज मानक प्रजातियों पंत चना 186 एवं पूसा 256 से अधिक पाई गई है।

किसानों के खेतों में किये गये परीक्षणों में भी पंत चना-3 की औसत उपज मानक प्रजातियों से अधिक मिली है। इसका दाना बड़े आकार का होता है।

100 दानों का वजन लगभग 25 ग्राम है। यह प्रजाति चने की प्रमुख बीमारी उकठा रोग, फली छेदक कीट के लिए सहनशील है। इसकी परिपक्वता अवधि 145-150 दिन है।

पंत चना-4: उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में तीन वर्षों तक किये गये प्रजाति परीक्षणों में पंत चना-4 की औसत उपज 1837 किग्रा प्रति हेक्टेयर पायी गई है।

जो कि मानक प्रजाति पंत चना 186 से 16.3 प्रतिशत एवं पूसा 256 से 17.8 प्रतिशत अधिक है। किसानों के खेतों में किये गये परीक्षणों में भी इसकी औसत उपज 1705 किग्रा प्रति हेक्टेयर पायी गई।

पंत चना तीन प्रजाति की भांति इसका दाना भी बड़े आकार का होता है। 100 दानों का वजन करीब 26 ग्राम है। यह प्रजाति चने की प्रमुख बीमारी उकठा रोग, फली छेदक कीट के लिए सहिष्णु है।

 इसकी परिपक्वता अवधि 145-150 दिन है। पंत काबुली चना-2: उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में तीन वर्षों तक किये गये प्रजाति परीक्षणों में पंत काबुली चना-2 की औसत उपज मानक प्रजाति पंत काबुली चना-1 से 16 प्रतिशत अधिक पाई गई है।

किसानों के खेतों में किये गये परीक्षणों में भी इसकी औसत उपज मानक प्रजाति से अधिक पायी गई। यह प्रजाति समय से एवं देर से बुवाई के लिए उपयुक्त है।

इसके 100 दानों का वजन लगभग 32 ग्राम है। यह प्रजाति चने की प्रमुख बीमारी उकठा रोग के लिए अवरोधी एवं फली छेदक कीट के लिए सहनशील है। इसकी परिपक्वता अवधि 135-150 दिन है।

पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डा. मंगला राय ने चने की पंत चना-3, पंत चना-4, काबुली चने की पंत काबुली चना-2 प्रजातियों को उत्तराखंड राज्य प्रजाति विमोचन समिति द्वारा किसानों को बुवाई के लिए जारी किये जाने पर खुशी जताते हुए निदेशक शोध डा. जेपी सिंह, दलहन प्रजनन परियोजना के वैज्ञानिकों डा. आरके पवार, डा. एसके वर्मा, डा. अंजू अरोरा को बधाई दी है। उन्होंने बाजार की मांग के अनुरूप बड़े दाने वाली चने की काबुली प्रजातियों के विकास पर विशेष ध्यान देने की सलाह भी दी है।
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