उत्तराखंड की सियासत में पिछले तीन माह की अस्थिरता से मुख्यमंत्री हरीश रावत खासे दुखी और चिंतित हैं। शनिवार को लालपुर के रामेश्वरपुर गांव में आए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हेलीपैड पर अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वह इस प्रदेश के सबसे चिंतित मुख्यमंत्री हैं। पिछले तीन महीने में सत्ता में जो विपक्ष और कुछ अपनों ने उठापटक की है उससे उनके दिल को बहुत आघात पहुंचा है और वह बेहद दुखी और चिंतित हैं।
चिंता की बात इसलिए है कि इन तीन महीनों में जो विकास इस प्रदेश का होना था वह पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। मार्च के बजट में प्रदेश के लिए करीब 500 से लेकर 700 करोड़ रुपये का जो बजट रखा गया था विपक्ष ने उस पर ब्रेक लगा दिए, उसका कोई अता-पता नहीं है। इससे विकास की दृष्टि से भी राज्य काफी पीछे चला गया है।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ जो षड्यंत्र और रणनीति बनाई, प्रदेश भाजपा संगठन ने उस पर धार लगाकर एक चुनी हुई सरकार की हत्या कर दी। सदन में जो राज्य के विकास के लिए बजट पारित किया उसे भी केंद्र सरकार ने कैद कर दिया है, जिसे केंद्र सरकार अवमुक्त नहीं कर रही है। राज्य को केंद्र से मिलने वाली किसी भी योजना को न दिया जाना और विकास के रास्ते बंद करते हुए सरकार को गिराना इससे बड़ा चिंतित मुख्यमंत्री भला किस प्रदेश का होगा।
यह तो इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि जिसे बयां करना भी अच्छा नहीं लगता। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को विकास की दृष्टि से इतना पीछे धकेल दिया गया है कि वर्ष 2015-16 का बजट भी खर्च नहीं हो पाया। भाजपा की कुर्सी की भूख ने प्रदेश की गरीब जनता के पेट पर लात मारी है। वित्तीय वर्ष के बजट अगर पारित होते, उन्हें विकास पर खर्च किया जाता तो निश्चित तौर पर कहीं न कहीं इस राज्य का भला होता। आगामी विधानसभा चुनाव की क्या तैयारियां कांग्रेस कर रही है इस सवाल पर सीएम ज्यादा कुछ न कहते हुए बस यही बोले कि चुनाव के लिए पार्टी पूरी तरह से तैयार है। हर कार्यकर्ता मुस्तैद है।