अमृत प्रचार संगत की ओर से नवीन अनाज मंडी में आयोजित तीन दिवसीय होला मोहल्ला का शुभारंभ शनिवार को श्री गुरुग्रंथ साहिब के पाठ से हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली आदि शहरों की संगत शामिल हुई।
होला मोहल्ला के कार्यक्रम में शुक्रवार से ही संगत आनी शुरू हो गई थी। अमृतसर से आए हजूरी रागी जत्था के भाई राय सिंह ने प्रवचनों से संगत को निहाल किया। यहां पर ज्ञानी हरजोत सिंह जालंधर, ज्ञानी गुजर सिंह असंध, भाई कमलजीत सिंह हजूरी रागी श्री दरबार साहब अमृतसर, ज्ञानी नरेंद्र सिंह करनाल, भाई जगजीत सिंह, सहजपाल सिंह पटियाला ने गुरु महिमा का बखान किया।
दोपहर 12:30 बजे अरदास के बाद सत्संग शाम 04:30 बजे फिर शुरू हुआ। इस मौके पर कंवलजीत सिंह बठला, गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान निर्मल सिंह हंसपाल, तेजपाल सिंह, जगरूप सिंह, रूबल बठला, सुरेंद्र सिंह ग्रोवर, तजेंद्र सिंह, गुरप्रीत सिंह, गुरचरन सिंह, हरविन्दरपाल सिंह, जगजीत सिंह खालसा, त्रिलोक सिंह, सुखविन्दर सिंह, सतनाम सिंह, सतपाल सिंह कक्कड़ आदि मौजूद रहे।
पास के गांवों में श्रद्धालुओं के ठहरने की है व्यवस्था
किच्छा। गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रधान निर्मल सिंह हंसपाल ने बताया कि शुक्रवार से ही श्रद्धालुओं के जत्थे आने शुरू हो गए थे। बताया कि बाहर से आने वाली संगत के लिए ग्राम आजादनगर, बडिंया, रामेश्वरपुर, महाराजपुर, मलसा गिरधरपुर आदि में ठहरने की व्यवस्था है।
24 साल बाद हुआ अमृत प्रचार संगत
किच्छा। अमृत प्रचार संगत की ओर से नगर में यह कार्यक्रम 24 वर्ष बाद हुआ है। बताया कि इससे पहले इसी मंडी परिसर में यह समागम 1995 में हुआ था। यह समागम हर साल देश के अलग अलग शहरों में आयोजित किया जाता है।
पीले रंग में नजर आए श्रद्धालु
किच्छा। आयोजन कमेटी के कंवलजीत सिंह बठला ने बताया कि अमृत प्रचार संगत के बाबा हरभजन सिंह ने कहा था कि आपके अंदर और बाहर दोनों वसंत ऋतु की तरह होने चाहिए, जिससे खुशी मिले। समागम में आने वाले श्रद्धालु पीले रंग की पगड़ी और महिलाएं पीले रंग का दुपट्टा पहने हुई थीं।
दिन भर चलता रहा लंगर
किच्छा। समागम की व्यवस्था के लिए सैकड़ों श्रद्धालु लगे रहे। यहां दिन भर लंगर चलता रहा। शारीरिक परेशानी के लिए चिकित्सा व्यवस्था के साथ डाक्टर सेवादार भी थे। बताया कि समागम में पांच सौ से अधिक सेवादार विभिन्न स्थानों पर अपनी ड्यूटी पर मौजूद रहे। इस मौके पर पूरी मंडी को आकर्षक ढंग से सजाया गया। कई स्थानों पर तोरण द्वार बनाये गये सुबह तड़के से देर शाम तक लंग की व्यवस्था जारी रही।