जहां कभी असलहों की धमक ताकत का प्रतीक मानी जाती थी। कब, कहां और किस बात में गोली चल जाए कोई नहीं जानता था। अब ये हनक फीकी पड़ने लगी है। कभी गन कल्चर से थर्राते ऊधमसिंह नगर जिले ने अब ट्रिगर पर नहीं कानून पर भरोसा दिखाना शुरू कर दिया है। रेवड़ी की तरह असलहा लाइसेंस बंटना अब इतिहास बन चुका है। पूरे साल में सिर्फ दो लोगों को ही लाइसेंस मिला है। तराई का यह इलाका लंबे समय से अपराध के नक्शे पर सबसे ऊपर रहा है।
छोटी-छोटी बातों पर यहां गोलियां चल जाती थीं। कई बार लाइसेंसी असलहों से भी। पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि जिले में इस वक्त 9966 लोग असलहा धारक हैं। पहले रोजाना कई आवेदन आते थे। अब पुलिस ने नियम सख्त कर दिए हैं।
हाईकोर्ट ने भी दिखाई सख्ती
अवैध हथियारों पर अंकुश लगाने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अगस्त 2025 में गृह सचिव और डीजीपी को कठोर निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि दो हफ्तों में रिपोर्ट पेश की जाए कि अवैध हथियारों की रोकथाम के लिए क्या किया जा रहा है। इस निर्देश के बाद प्रदेशभर में कार्रवाई तेज हुई।
सोशल मीडिया से सलाखों तक
टशन दिखाने के शौकीन कुछ युवकों ने इंटरनेट मीडिया पर अवैध असलहों के साथ तस्वीरें पोस्ट कीं। पुलिस ने इन्हें तुरंत ट्रैक कर जेल पहुंचा दिया। 50 से अधिक अवैध असलहे बरामद हुए हैं और अब ये सभी मालखाने में जमा हैं।
जंगल से लेकर शहर तक शिकंजा
गन कल्चर पर नकेल कसने के साथ-साथ पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले एक साल में 32 कुख्यात अपराधी मुठभेड़ों में घायल हुए हैं। इनमें हिस्ट्रीशीटर, गैंगस्टर और वन तस्कर तक शामिल हैं।