रुद्रपुर। जवाहर नवोदय विद्यालय की जमीन का मामला सरकारी कामकाज के ढर्रे का जीता-जागता उदाहरण है। जमीन आवंटन के 39 वर्ष बाद भी विद्यालय के नाम जमीन दर्ज नहीं हुई है। वर्ष 1986 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार की पहल पर केंद्र सरकार ने रुद्रपुर में जवाहर नवोदय विद्यालय को मंजूरी दी। केंद्रीय उपक्रमों के लिए राज्य सरकार को निशुल्क जमीन उपलब्ध करानी होती है। यह संस्थान मंजूरी की पहली शर्त होती है। सरकारी जमीन या अन्य नाप जमीन की अनुपलब्धता कहें या प्रशासनिक उदासीनता। विद्यालय के लिए काशीपुर हाईवे किनारे 19 एकड़ नजूल भूमि आवंटित कर दी गई। इस भूमि में विद्यालय के भवन बन गए। विद्यालय संचालित हो गया।
वर्ष 1995 में प्रख्यात स्वाधीनता सेनानी सरदार ऊधम सिंह के नाम से सरकार ने अलग जिले का गठन कर दिया, लेकिन उसके बाद भी जवाहर नवोदय विद्यालय की जमीन का मसला नहीं सुलझा। वर्ष 2000 में यूपी से अलग होकर पृथक राज्य बन गया। राज्य बनने के 25 साल बाद भी जवाहर नवोदय विद्यालय भूमि के स्वामित्व की बाट जोह रहा है। प्रशासनिक अमला भूमि हस्तांतरण के मामला सुलझाने के दावे करता रहा है। प्रदेश सरकार को इस संबंध में प्रस्ताव भेजने की बातें कही जाती रही हैं, लेकिन समस्या आज भी जस की तस है। संवाद
इंसेट:
फ्री होल्ड की रकम का पेच
केंद्रीय उपक्रम को निशुल्क भूमि का आवंटन करने का नियम, फ्री होल्ड का शुल्क भूमि हस्तांतरण की मुख्य बाधा माना जाता है। नजूल भूमि को विद्यालय के नाम फ्री होल्ड करने में निर्धारित शुल्क जमा करने का प्रावधान है। जमीन निशुल्क आवंटित करने के नियम के चलते जवाहर नवोदय विद्यालय प्रशासन जमीन फ्री होल्ड करने का शुल्क अदा करने में सक्षम नहीं है। यह रकम किस मद से वहन की जाए, इसका तोड़ प्रशासन और सरकार नहीं निकाल सके हैं।
कोट
जवाहर नवोदय विद्यालय की जमीन के स्वामित्व के मामले को प्रमुखता से शासन के सामने उठाया जाएगा। मामले का प्राथमिकता से समाधान कराया जाएगा। जमीन विद्यालय के नाम हस्तांतरित कराई जाएगी। -शिव अरोरा, विधायक रुद्रपुर