बाजपुर कोतवाली में तहसीलदार केपी सिंह की मौजूदगी में सिक्कों की गिनती करती पुलिस।
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तीन दिन पहले गांव हरसान सरला नदी में बच्चों को मिले सिक्के ग्रामीणों ने तहसीलदार केपी सिंह और सीओ बीएस चौहान को सौंप दिए। इस दौरान सर्राफा से जांच कराने पर सिक्के गिलेट के होने की पुष्टि हुई। सर्राफा के अनुसार प्रति सिक्के का वजन 11.66 ग्राम और कीमत सात रुपये है। सिक्के में मात्र तीन रुपये की चांदी बताई गई है।
छह अक्तूबर को बाजपुर के गांव हरसान की सरला नदी में कुछ बच्चे मछली मार रहे थे।
इस दौरान दो छोटे कट्टे सिक्कों से भरे मिले। खबर मिलते ही आसपास के ग्रामीण जुट गए। कई लोग सिक्के उठा ले गए। रविवार को भाजपा नेता योगेश मुनगली, डीके जोशी, दीपू डोबाल, डिम्पल, भगवान सिंह करीब दस किलो सिक्के लेकर कोतवाली पहुंचे। उन्होंने सीओ बीएस चौहान, तहसीलदार केपी सिंह, कोतवाल वीडी उनियाल के सुपुर्द कर दिए। तहसीलदार मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में सर्राफा गोपाल कृष्ण, विकास गुप्ता से सिक्कों की जांच कराई, जिसमें सिक्के गिलेट धातु के बने होने की पुष्टि हुई। कोतवाल वीडी उनियाल ने बताया कि 916 सिक्के मिले हैं, जिन्हे सरकारी खजाने में जमा कराया जाएगा।
कहीं बदल तो नहीं दिए सिक्के!
बाजपुर। बरामद सिक्कों पर विक्टोरिया-1886 अंकित है। लोगों का कहना है कि तीन दिन पहले दो कट्टों मेें करीब 45 किलो सिक्के थे। सिक्के असल चांदी के होते तो इनकी कीमत करीब 38 लाख रुपये होती। चर्चा यह भी है कि बच्चों को मिले सिक्के चांदी के थे, लेकिन पुलिस को गिलेट के सिक्के सौंपे गए हैं। ग्रामीणों ने मामले की पुरातत्व विभाग से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।