पंतनगर तराई बीज विकास निगम (टीडीसी) में कर्मचारियों ने गेहूं बीज का नमूना फेल होने के बाद स्कीम निकालकर 16 करोड़ रुपये की चपत लगा दी। टीडीसी द्वारा भेजा गया करीब 50 हजार क्विंटल बीज जांच के बाद बिहार कृषि विभाग ने फेल कर दिया था। कर्मचारियों ने इस बीज पर डेढ़ क्विंटल पर आधा क्विंटल बीज मुफ्त देने की योजना निकाली और बीज वितरकों के साथ मिलकर किसी और को बेच दिया। घोटाले के कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य एसआईटी के हाथ लगे हैं।
टीडीसी में गेहूं बीज बिक्री के नाम पर किए गए घोटाले का तानाबाना बीज बुआई के अंतिम समय में ही बुन दिया गया था। गेहूं बीज तैयार होने के बाद आठ महीने तक ही बुआई के लिए उपयोगी माना जाता है। इसके बाद बीज की उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। अक्तूबर और नवंबर में गेहूं बीज की बुआई की जाती है। सूत्रों के अनुसार, टीडीसी ने बुआई सीजन निकलने के बाद करीब 85 हजार क्विंटल बीज बिहार, यूूपी और पश्चिम बंगाल के लिए भेजा।
बिहार भेजे गए करीब 50 हजार क्विंटल गेहूं बीज को जब कृषि विभाग ने जांच में फेल कर दिया तो कर्मचारियों ने वितरकों के साथ मिलकर बीज का सौदा कहीं और कर दिया, जबकि कागजों में बीज की बिक्री दिखाने के लिए डेढ़ क्विंटल बीज पर आधा क्विंटल बीज मुफ्त देने की स्कीम किसानों के लिए निकाल दी। हालांकि किसान यह बीज लेने के लिए तैयार नहीं थे। पूरे बीज को बेचने में कर्मचारियों ने योजना के तहत मुफ्त दिए गए आधे क्विंटल बीज में मुनाफा कमाया।
बिहार के बेगुसराय, मुजफ्फरपुर, पटना और पूर्णिया में बीज की खेप भेजी गई थी। जांच के लिए बिहार गई एसआईटी के हाथ महत्वपूर्ण साक्ष्य लगे हैं। यूपी और पश्चिम बंगाल भेजे गए करीब 35 हजार क्विंटल बीज की भी एसआइटी जांच कर रही है।
आटा मिलों में गेहूं बीज खपाने का अंदेशा
रुद्रपुर। टीडीसी में बुआई के बाद स्कीम निकालने के कारण किसानों ने बीज नहीं खरीदा और खुले बाजार में भी बीज की बिक्री नहीं हुई ऐसे में एसआईटी इस बात का अंदेशा लगा रही है कि बीज को कर्मचारियों और वितरकों द्वारा आटा मिलों को बेचा गया। सूत्रों के अनुसार कुछ साक्ष्य भी एसआईटी को मिले हैं।
टीडीसी में कैसे पास हो गया नमूना
रुद्रपुर। टीडीसी में किसानों के लिए तैयार किये जाने वाले गेहूं बीज की चार बार जांच की जाती है। पहली जांच किसान से बीज खरीदते समय, दूसरी गोदाम में स्टॉक करने के दौरान, तीसरी ट्रीटमेंट करने पर और चौथी जांच बीज प्रमाणिक संस्था द्वारा की जाती है। इन सब जांचों में सही पाया गया बीज बिहार पहुंचकर फेल हो गया।