रुद्रपुर। वैश्विक स्तर पर युद्धविराम की घोषणा होने के बाद भी स्थानीय उद्योगों और कारोबार प्रभावित है। सिडकुल क्षेत्र की कई कंपनियों में संचालित कैंटीनें गैस की किल्लत से जूझ रही हैं। सिलिंडर की अनियमित आपूर्ति से कैंटीन संचालकों को लकड़ी पर भोजन बनाना पड़ रहा है। वहीं तमाम कंपनियों ने पीएनजी कनेक्शन ले लिया है इससे कुछ हद तक राहत है।
कैंटीनों में रोजाना हजारों मजदूरों के लिए भोजन बनता है। ऐसे में चावल-दाल तो तैयार हो जा रहे हैं लेकिन गैस नहीं होने से रोटी बनाने में ज्यादा परेशानी हो रही है। लकड़ी पर रोटी बनाना समय लेने वाला और कठिन है। इससे भोजन बनाने में देरी हो रही है। इसका असर मजदूरों के कार्य समय और उत्पादन क्षमता पर पड़ रहा है।
सिडकुल में एक कंपनी के एचआर केशव चंद्रा का कहना है कि गैस की कमी से कैंटीन चलाना चुनौतीपूर्ण है। हमारे यहां रोजाना सैकड़ों मजदूर खाना खाते हैं। गैस नहीं मिलने से हमें लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है जिससे समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं। वहीं, एक दूसरी कंंपनी के संतोष सिंह का कहना है कि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो उत्पादन पर और असर पड़ सकता है। कैंटीन व्यवस्था प्रभावित होने से मजदूरों की दिनचर्या बिगड़ रही है। इसका सीधा असर काम की गति पर पड़ता है।