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खास खबर: फल मक्खी पर कीटनाशक का नहीं...खुशबू से वार, उद्यान वैज्ञानिक ने खोजा समाधान; यह है फायदा

Wed, 15 Oct 2025 01:06 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो आदर्श सिंह, अमर उजाला

सार

कृषि विज्ञान केंद्र ने फल मक्खियों के प्रकोप को रोकने के लिए एक सस्ता और प्रभावी जैविक उपाय फेरोमोन ट्रैप ढूंढ निकाला है। यह ट्रैप फलों को होने वाले नुकसान को काफी कम करके किसानों को प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये के सालाना नुकसान से बचा रहा है।
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फेरोमेन ट्रैप को खेत में लगाकर दिखाते उद्यान वैज्ञानिक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमरूद और सब्जियों को अंदर ही अंदर सड़ा देने वाली फल मक्खी अब खुद जाल में फंस जाएगी। कृषि विज्ञान केंद्र काशीपुर के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अनिल चंद्रा ने ऐसा जैविक उपाय खोज निकाला है जिसने किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी है। इस उपाय का नाम है फेरोमोन ट्रैप। फल मक्खी के प्रकोप को समाप्त करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान वैज्ञानिकों ने फेरोमेन ट्रैप का खेतों में परीक्षण किया। यह उपाय काफी प्रभावी साबित हो रहा है। साधारण-सा दिखने वाला यह यंत्र खेतों में मक्खियों के प्रकोप को खत्म कर रहा है और हर साल एक एकड़ में किसानों को होने वाले एक लाख रुपये तक के नुकसान से बचा रहा है। जिन खेतों में इस ट्रैप को लगाया गया वहां किसानों ने खुद फर्क महसूस किया। पहले जहां फलों पर छेद और सड़न आम बात थी अब वे ताजगी से लदे हैं। डॉ. अनिल चंद्रा ने बताया कि यह जैविक और कम बजट का सबसे बेहतर उपाय है।
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कैसे काम करता है यह ट्रैप
डॉ. चंद्रा बताते हैं फल मक्खी की मादा फलों के पास अंडे देती है। अंडों से निकलने वाले कीड़े फलों में छेद कर उन्हें सड़ा देते हैं। इससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और उपज घट जाती है। फेरोमोन ट्रैप में इन्हीं मक्खियों की प्राकृतिक गंध यानी फेरोमोन को भरा जाता है। यह गंध नर मक्खियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। जैसे ही वे ट्रैप में जाते हैं वहीं मर जाते हैं और उनका जीवन चक्र टूट जाता है। इस तकनीक से न सिर्फ खेतों में फल मक्खी की संख्या घटती है बल्कि आने वाले सीजन में उनका प्रकोप भी कम हो जाता है।

किस फसल में कितना असर
फेरोमोन ट्रैप ने अमरूद, आम और कद्दूवर्गीय फसलों (जैसे खीरा, लौकी, करेला, टिंडा) में बेहतरीन असर दिखाया है। इन फसलों में फल मक्खी का प्रकोप 30 से लेकर 100 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकता था। अब किसान प्रति एकड़ 45 हजार से एक लाख रुपये तक का नुकसान बचा पा रहे हैं। डॉ. चंद्रा का कहना है कि प्रति एकड़ 10 से 16 ट्रैप लगाने पर शानदार नतीजे मिलते हैं। आम और अमरूद के लिए मिथाइल यूजेनॉल गंध वाले ट्रैप, कद्दूवर्गीय सब्जियों के लिए क्यू-ल्यूर ट्रैप सबसे कारगर हैं।
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क्षेत्र में अमरूद और सब्जियों की फसलें फल मक्खी के कारण सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। इस पर नियंत्रण के लिए खेतों में फेरोमेन ट्रैप का परीक्षण किया गया था। यह उपयोगी साबित हुआ और किसानों को भी इसका असर देखने को मिला है। यह जैविक उपाय है। - डॉ. अनिल चंद्रा, उद्यान वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, काशीपुर
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