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संघर्ष से ही महिलाओं ने हर मुकाम हासिल किया 

Thu, 14 Mar 2019 12:07 AM IST
अरुण कुमार अमर उजाला ब्यूरो
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गुरुकुल एकेडमी छिनकी में अपराजिता कार्यक्रम में सिरकत करते अतिथि व बच्चे। - फोटो : amar ujala
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डायनेस्टी मॉडर्न गुरुकुल अकादमी छिनकी में आयोजित अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में उपजिलाधिकारी निर्मला बिष्ट ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 

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उन्होंने छात्राओं से कहा कि बड़ी मुश्किल और संघर्ष के बाद महिलाओं ने हर क्षेत्र में स्वयं को स्थापित किया है। छात्राओं निकिता भंडारी, भावना कन्याल, नीतू चंद, महिमा चंद ने आत्मरक्षा के टिप्स दिए।

प्रबंधक धीरेंद्र भट्ट, प्रधानाचार्य अंजू भट्ट ने अतिथियों का आभार जताया। अंत में एसडीएम बिष्ट ने महिला सशक्तीकरण की शपथ दिलाई। इस मौके पर मैनेजिंग डायरेक्टर प्रेमा भट्ट आदि मौजूद रहे।
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महिलाओं को अपनी क्षमता पहचाननी होगी। जब महिलाएं अपनी क्षमता पहचान लेंगी तो वह सशक्त भी होंगी और आगे भी बढ़ेंगी। - डॉ. शिप्रा अग्रवाल

बेटियां प्यार की प्रतीक हैं, जो दो घरों में उजियारा करती हैं। बेटियां जब तक घर में रहती हैं यहीं उसका परिवार होता हैं। जब ससुराल चली जाती है तो वही उसका परिवार हो जाता है।  
विमला मुंडेला, समाजसेवी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेल प्रतियोगिताओं में आधी आबादी ने अपना परचम लहराया है। किसी तरह की समस्या होने पर बेटियां परिजनों से बात करें, ताकि उसका समाधान हो सकें। 
दीपा भंडारी, अधिवक्ता

मैं शक्ति हूं मुझे कमजोर न समझें, है ऐसा कौन सा काम जो मैं कर न सकूं, चढ़ी एवरेस्ट पर फिर भी कभी न थकी....। - रेनू जोशी, शिक्षिका

छात्राओं को हम बताते हैं कि संकल्प के साथ किए गए हर काम में सफलता मिलती है। जब आप पढ़ेंगी तभी तो आगे बढ़ेंगी।
ऊषा चौसाली, शिक्षिका

आज के दौर में महिलाएं पुरुषों से आगे निकल गई हैं और वह हर क्षेत्र में चाहे वह खेल हो, राजनीति हो या व्यवसाय हो, हर क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं। 
नीतू चंद, शिक्षिका 

जब हम अपनी झिझक को दूर करेंगे तभी तो अपनी मंजिल को पा सकेंगे। अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स भी हमें यहीं बताता है कि महिलाएं सशक्त होकर आगे बढ़ सकतीं हैं। 
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साक्षी खड़ायत, छात्रा 

जो जीते असत्य से वहीं तो सत्य नाम है, यही तो रामबाण है,
उस बच्ची का छोटा सा ही तो जहान है,
मारा जिसे कोख में क्या तू महान है?
छोटी सी वो जान थी, कितनी नादान थी,
तुम जैसे पापियों से वो तो अंजान थी,
तूं समझता तो ठीक है, क्या इसका प्रमाण है यही तो रामबाण है...
विनय जोशी, छात्र
 

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