हल्द्वानी। भारत में हरित क्रांति का अग्रदूत रहा गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय का किसान मेला नवाचार और कृषि तकनीक का जीवंत संगम बना।
परिसर में चार दिन तक मिनी भारत का नजारा दिखा। एक ही मंच पर प्रगतिशील किसान, वैज्ञानिक, उद्यमी और विद्यार्थी कृषि के नए दौर की प्रगतिशील खेती-बागवानी की पटकथा लिखते नजर आए।
सोमवार को 118वें किसान मेले का औपचारिक समापन हुआ। इस बार लगभग 37,000 किसानों ने पंजीकरण कराया जबकि पिछले आयोजन में यह आंकड़ा 30000 था। पांच सौ से अधिक स्टॉल लगाए गए जो पिछली बार 350 की तुलना में ज्यादा व्यापक आयोजन की बानगी है।
यह बढ़ोतरी बताती है कि किसान मेला केवल एक रस्म अदायगी भर नहीं बल्कि खेती-किसानी में आत्मनिर्भरता और तकनीक से तरक्की की ओर बढ़ने का प्रतीक बन चुका है।
स्मार्ट कृषि एवं डिजिटल क्रांति से समृद्ध किसान थीम पर आधारित इस मेले में कृषि के हर क्षेत्र से जुड़े नवाचारों की झलक दिखी। कहीं ड्रोन से खेतों की निगरानी के प्रदर्शन हुए तो कहीं जल संरक्षण और जैविक खेती के मॉडल ने ध्यान खींचा। किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती, फसल विविधीकरण और मार्केटिंग के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी गई।
पंत वििव हर साल रबी और खरीफ की बुआई से पहले किसान मेले का गवाह बनता है। पिछला आयोजन इसी साल मार्च में हुआ। इस बार खास बात यह रही कि देश भर से आए हजारों किसानों ने यहां न सिर्फ तकनीक साझा की बल्कि एक-दूसरे से सीखने की भावना भी दिखाई।