फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आजादी के लिए सात महीने एक दिन जेल में रहे स्वतंत्रता सेनानी गुरदयाल सिंह का निधन

विज्ञापन
विज्ञापन
सितारगंज। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सात महीने जेल में रहने वाले 98 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गुरदयाल सिंह का बृहस्पतिवार को निधन हो गया है। शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। वर्ष 2010 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और वर्ष 2012 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें सम्मानित किया था।
विज्ञापन

सिसैया गांव निवासी सरजीत सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार की शाम उनके पिता गुरदयाल सिंह का घर पर ही निधन हो गया। गुरदयाल सिंह का जन्म पाकिस्तान के गांव चूड़काना सच्चा सौदा जिला शेखुपुरा पंजाब प्रांत में दस अक्तूबर 1924 को हुआ था। उन्होंने दस साल की उम्र में ही आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था। 1941-42 के भारत छोड़ो आंदोलन में भागीदारी की। एक नवंबर 1941 को अंग्रेजों ने उन्हें पंडित जवाहर लाल नेहरू के करीबी नेता तेजा सिंह समेत अन्य 12 साथियों के साथ पाकिस्तान की लैलपुर जेल में बंद कर दिया था। जनवरी 1942 को अंग्रेजों ने फिर गुरदयाल को लाहौर जेल में डाला था। उन्होंने सात महीने जेल में बिताए थे। वर्ष 1947 में जब देश आजाद हुआ तो वह पाकिस्तान के चूड़काना से पंजाब प्रांत के पटियाला सरहंद में आकर बसे गए थे। यहां से 1956 में सितारगंज के सिसैया गांव में बस गए और तब से उनका परिवार यहीं रहता है। दिवंगत गुरदयाल की पत्नी महेंद्र कौर का 12 साल पहले निधन हो गया था। उनके चार बेटे और छह बेटियां हैं। इधर, एसडीएम मुक्ता मिश्र व सीओ भूपेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि शुक्रवार को ससम्मान उनका अंतिम संस्कार कराया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें