काशीपुर। धोखाधड़ी, चोरी कर धमकाने के मामले में अवर न्यायालय के निर्णय के खिलाफ दायर निगरानी याचिका तृतीय एडीजे रजनी शुक्ला ने सुनवाई के बाद स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने अवर न्यायालय को निगरानीकर्ता के प्रार्थना पत्र का निस्तारण करने के आदेश दिए हैं।
गौतमनगर टांडा उज्जैन निवासी मुकेश ने अवर न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर कहा है कि उसने खड़कपुर देवीपुरा निवासी जीवन तिवारी से बारह लाख रुपये में एक मकान खरीदा था। बैनामे के बाद उसने दाखिल खारिज के लिए प्रार्थना पत्र दिया तो विपक्षी ने उसके दाखिल खारिज पर रोक लगा दी। मुकेश के मुताबिक सात मई 2019 को वह घर में ताला लगाकर सपरिवार बाहर गया था। अगले दिन लौटकर आया तो देखा कि घर के ताले कुंडी टूटी थी। सारा सामान गायब था।
जानकारी करने पर पता लगा कि जीवन और उसकी पत्नी ने मकान के ताले तोड़े हैं। उसने आठ मई 2019 को पुलिस को तहरीर सौंपी लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। अवर न्यायालय ने 14 जून 2019 को यह प्रार्थना पत्र इस आधार पर निरस्त कर दिया कि इस मामले में पुलिस को सूचना नहीं दी गई है। इस फैसले के खिलाफ मुकेश ने रुद्रपुर न्यायालय में निगरानी याचिका प्रस्तुत की। उसने अदालत में घटना के संबंध में एएसपी को दी गई सूचना और बैनामे की प्रति प्रस्तुत की। सुनवाई कर तृतीय एडीजे रजनी ने निगरानी याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए अवर न्यायालय को धारा 156 (3) के तहत प्रस्तुत प्रार्थना पत्र का निस्तारण करने के आदेश दिए हैं।