नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से सिडकुल की एएनजी फैक्ट्री को सीज किए जाने की कार्रवाई से युवाओं के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है और वह खाली हाथ बैठ गए हैं। फैक्ट्री में काम करने वाले सैकड़ों हाथों से रोजगार न छिन जाए, इसको लेकर वर्करों में चिंता दिखाई दे रही है। वहीं, कंपनी को भी रोजाना का 27.30 लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ेगा।
औद्योगिक आस्थान सिडकुल में वर्ष 2007 में एएनजी कंपनी की स्थापना हुई थी। जो अशोका लीलैंड कंपनी की टिपर बॉडी बनाती है। इसके अलावा बीएचएल के पावर प्लांट इस्ट्रक्चर के उत्पादन का भी प्लांट संचालित है। कंपनी के जीएम राजन शर्मा ने बताया कि फैक्ट्री में चार सौ कर्मचारी कार्यरत हैं। जिसमें 55 कर्मचारी प्रबंधन में हैं और 345 श्रमिक हैं। जिन्हें प्रतिदिन 30 हजार रुपये सैलरी दी जाती है। उन्होंने बताया कि अशोका लीलैंड कंपनी की प्रतिदिन आठ टिपर (डंपर और हाइवा) बॉडी बनाई जाती हैं। जिनकी सेल कॉस्ट करीब 20 लाख रुपये है।
इसके अलावा प्रतिदिन करीब 10 टन बीएचएल के पावर प्लांट इस्ट्रक्चर का उत्पादन किया जाता है। इसकी कीमत करीब सात लाख रुपये है। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री सीज होने पर कंपनी को प्रतिदिन करीब 27.30 लाख रुपये की आर्थिक क्षति झेलनी पड़ेगी। वहीं, प्लांट में काम करने वाले श्रमिकों को रोजगार छिनने का भय सताने लगा है। अगर, यह कंपनी शीघ्र चालू नहीं हुई तो चार सौ कर्मचारियों के हाथ रोजगार से खाली हो जाएंगे। इससे कर्मचारियों में मायूसी है।