पुलिस ने आईपीएल मैचों में सट्टा लगाते चार लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 1.50 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई है। इस मामले में एक व्यापारी नेता समेत दो लोग फरार बताए गए हैं।
बृहस्पतिवार को एएसपी राजेश भट्ट ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने शुगर मिल रोड टांडा उज्जैन से एक कार में सवार चार लोगों को पकड़ा। ये लोग रॉयल चैलेंजर और मुंबई इंडियन के आईपीएल मैचों में ऑनलाइन सट्टा लगवा रहे थे। पुलिस ने उनसे 4 मोबाइल फोन और 1.49 लाख रुपये बरामद किए हैं। पकड़े गए सटोरिये जनपद रामपुर थाना स्वार के ग्राम रसूलपुर निवासी आले हसन उर्फ सेठ जी, ग्राम रायका इमरता निवासी अरमान और जावेद तथा चक रामपुर निवासी अरशी हुसैन हैं। इनमें सेठ जी बुकी और शेष 3 एजेंट हैं।
बाजपुर निवासी गुरुजी और काशीपुर निवासी नीटू उर्फ पाजी भी बुकी का काम करते हैं। एएसपी ने बताया कि सेठ जी ने अपने मोबाइल में ऑनलाइन डिमांड की वेबसाइट पर सेठ 135 नाम से आईडी बनाई थी। इसी के माध्यम से सट्टे का हिसाब-किताब व अगले मैच के लिए बेट लगवाई जाती थी। आईडी में ऑनलाइन मैच का लाइव विवरण रहता है। एजेंट मोबाइल फोन के जरिये सट्टा लगाने वालों के संपर्क में रहते हैं। हार-जीत की लेनदेन का हिसाब सेठ जी ही करता था। पुलिस ने उनके कब्जे से बरामद कार सीज कर दी है। पुलिस को गुरुजी और पाजी की तलाश है। आरोपियों को पकड़ने वाली पुलिस टीम में कोतवाल चंद्रमोहन सिंह, एसएसआई सतीश कापड़ी, एसआई जावेद मलिक, जितेंद्र कुमार, वीरेंद्र, लक्ष्मण, सतीश, सुरेंद्र, कुलदीप, शंकर टम्टा व गिरीश कांडपाल थे।
व्यापार मंडल का पूर्व अध्यक्ष रहा है वांछित आरोपी
काशीपुर। आईपीएल का सट्टा लगवाने के मामले में चर्चा में आए व्यापारी नेता नीटू का एक दशक पूर्व तक बैटरी का कारोबार था। उसकी गिनती शहर के प्रतिष्ठित व्यापारियों में होती थी। वर्ष 1997 में वह उद्योग व्यापार मंडल का नगर अध्यक्ष चुना गया। व्यापार से इतर उसने शेयर मार्केट में हाथ आजमाया। इस धंधे में उसे भारी घाटा हुआ। इसके बाद से उसने अपना कारोबार भी बंद कर दिया।
अजीबो-गरीब है सट्टे के लिए बोली जाने वाली भाषा
काशीपुर। सटोरियों से हुई पूछताछ में जानकारी हुई कि इस खेल की भाषा भी अजीबो गरीब है। सट्टा लगाने वाले व्यक्ति को लाइन कहा जाता है, जो एजेंट यानी पंटर के माध्यम से बुकी (डिब्बे) के संपर्क में आता है। एजेंट को एडवांस देकर अकाउंट खुलवाना पड़ता है। जिसकी एक लिमिट होती है। बृहस्पतिवार को पकड़े गए सट्टे की लिमिट 2.45 लाख रुपये की थी। सट्टे के भाव को डिब्बे की आवाज बोला जाता है। सटोरियों की भाषा आम तौर पर ऐसी होती है। सेशन एक पैसे का है, मैने चवन्नी खा ली है, डिब्बे की आवाज कितनी है, तेरे पास कितनी लाइन है, इन्हीं शब्दों से सट्टे में करोड़ों का कारोबार होता है। यह पूरा नेटवर्क लैपटॉप, मोबाइल, वाइस रिकार्डर पर चल रहा है।
सट्टे की भाषा:- बुकी---डिब्बा, एजेंट--पंटर, क्लाइंट--लाइन, एक लाख--एक पैसा, सवा लाख--सवा पैसा, 25 हजार---चवन्नी, 50 हजार--अठन्नी
आईपीएल सट्टे का रैकेट संचालित करने के मामले में गुरुजी और पाजी की तलाश की जा रही है। डाटा के आधार पर अन्य आरोपियों को भी चिन्हित किया जा रहा है। शहर में एक और स्थान पर सट्टा होने की सूचना मिली है। जल्द की कार्रवाई होगी।
राजेश भट्ट, सीओ, काशीपुर