अविभाजित उत्तर प्रदेश के सहकारिता मंत्री रहे चौधरी समरपाल सिंह का बीमारी के चलते निधन हो गया। वह लगभग 96 वर्ष के थे। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को गंगेबाबा रोड स्थित श्मशानघाट पर किया जाएगा। चौधरी कांग्रेस नेत्री मुक्ता सिंह के पिता थे।
ज्योतिबा फूलेनगर के ग्राम अहरौली माफी निवासी समरपाल सिंह का जन्म 19 दिसंबर 1923 को हुआ था। 1963 में उनका परिवार काशीपुर के कुंडेश्वरी में आकर बस गया था। उन्हें सहकारिता का जनक माना जाता था। पंतनगर विवि से वह कृषि में गोल्ड मेडलिस्ट रहे। वर्ष 1988-89 के दौरान वह उत्तर प्रदेश सरकार में सहकारिता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नियुक्त किए गए।
वह उत्तरांचल सहकारी समिति अधिनियम निर्माण समिति के चेयरमैन भी रहे। इफ्को प्रतिनिधि सभा के भी सदस्य रहे। 2008 में दिल्ली में हुए सार्क देशों के कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में उन्होंने बतौर इफ्को प्रतिनिधि के रूप में शिरकत की। चौधरी का शुमार क्षेत्र के प्रतिष्ठित और जुझारू नेताओं में था। वह पिछले एक वर्ष से अस्वस्थ थे।
शुक्रवार को दोपहर ढाई बजे उन्होंने अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वह अपने पीछे पत्नी विजया सिद्धू, दो बेटियों कांग्रेस नेत्री मुक्ता सिंह व रचना सिंह के अलावा नातिन अनुराग सिंह, शशांक सिंह, श्वेता सिंह, शगुन व शिखर को छोड़ गए हैं। उनके निधन की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर छा गई।
पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा, इंका नेता मनोज जोशी, डॉ. दीपिका गुड़िया आत्रेय, संदीप सहगल, आशु टंडन, कैलाश सहगल, मुशर्रफ हुसैन, राशिद फारुकी, धीरेंद्र सिंह, विमल गुड़िया, उमेश जोशी, महेश अग्रवाल, विजेंद्र चौधरी, विकल्प गुड़िया समेत तमाम लोगों ने शोक व्यक्त किया है।