वन विभाग ने वनों को आग से बचाने के लिए तराई पूर्वी वन प्रभाग के अंतर्गत पड़ने वाले खटीमा, किलपुरा और सुरई वन रेंज में स्थापित 22 क्रू स्टेशनों 97 फायर वाचरों की तैनाती कर दी है। वन विभाग द्वारा पेड़ से गिरने वाले सूखे पत्तों को एकत्रित कर फायर ड्रिल का कार्य किया जा रहा है। वन विभाग आग को बढ़ने से रोकने के लिए ब्लोवर का भी प्रयोग कर रहा है।
गर्मी बढ़ने के साथ ही तराई पूर्वी वन प्रभाग की तीन रेंजों में आग की संभावनाओं को देखते हुए वन विभाग ने कड़े इंतजाम किए हैं। इसके अंतर्गत खटीमा वन रेंज में स्थापित आठ क्रू स्टेशनों में 32 फायर वॉचर तैनात किए गए हैं। किलपुरा वन रेंज में बनाए गए चार क्रूस्टेशनों में 25 फायर वॉचरों की तैनाती की गई है।
सुरई वन रेंज में सबसे अधिक 10 क्रू स्टेशनों में 40 फायर वॉचरों की तैनाती की गई है। इसके अलावा वन विभाग द्वारा जंगल से लगे गांवों में लोगों को जागरूक करने के लिए वाहनों से जंगलों को आग से बचाने के लिए मुनादी व गोष्ठियां की जा रही हैं। वन क्षेत्राधिकारी आरएस मनराल ने बताया कि जंगलों में पेड़ों से गिरने वाले सागोन के पत्तों को एकत्रित कर फायर वॉचरों द्वारा जलाया जा रहा है।
वन विभाग जंगल में लगी आग पर नजर रखने के लिए सेटेलाइट का उपयोग भी किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को सेटेलाइट से नौ जगहों पर आग लगने के रेड प्वाइंट दिखाए गए, जिसमें तराई पूर्वी वन प्रभाग में कहीं पर भी आग लगने की सूचना नहीं थी।
भीषण गर्मी व फायर सीजन में वन्य जंतुओं को पानी की कमी न हो इसके लिए वन विभाग ने विशेष ध्यान रखा गया है। किलपुरा व खटीमा वन रेंज में तीन वॉटर होल बनाए गए हैं। किलपुरा के वन क्षेत्राधिकारी किरन चंद्र कफल्टिया ने बताया कि उनके यहां दो वाटर होल हैं, जिसमें एक पक्का निर्माण व एक गड्ढा खोदकर बनाया गया है। खटीमा वन रेंज में नगरा तराई क्षेत्र में एक वॉटर होल बनाया है। वन क्षेत्राधिकारी सुरई आरके मौर्य ने बताया कि सुरई रेंज चारों ओर से नदी नालों के बीच है। यहां पानी की किसी प्रकार की कमी नहीं है।