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कृषि विधेयकों के विरोध में किसानों ने किया प्रदर्शन

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सितारगंज में मुख्य चौराहे पर कटोरा लेकर भीख मांगते पूर्व विधायक नारायण पाल व किसान। - फोटो : SITARGANJ
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बाजपुर। कृषि कानूनों के विरोध में किसानों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने केंद्र सरकार से कृषि कानूनों को किसानों के हित में वापस लेने की मांग की। इस दौरान किसानों ने राष्ट्रीय सीमांत किसान यूनियन का गठन कर संघर्ष करने का एलान किया।
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बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय सीमांत किसान यूनियन (अराजनैतिक) के अध्यक्ष केके शर्मा के गन्ना समिति रोड स्थित आवास पर बैठक आयोजित की गई। अध्यक्षता कर रहे केके शर्मा ने कहा कि कृषि कानूनों के बारे में जानकारी देकर किसानों को संगठित किया जाएगा। यूपी और उत्तराखंड में कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। कृषि कानूनों सहित किसानों की स्थानीय समस्याओं को लेकर यूनियन संघर्ष करेगी। इस दौरान मंच से गांव टांडा रतिभान निवासी अवतार सिंह सैनी को यूनियन का उत्तराखंड प्रदेशाध्यक्ष, सुल्तानपुर पट्टी नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद जान को प्रांतीय कोषाध्यक्ष, गांव रम्पुरा शाकर निवासी सुरेंद्र शर्मा को प्रांतीय उपाध्यक्ष, गांव मुंडिया कलां निवासी जाहिद हुसैन को जिलाउपाध्यक्ष, पूर्व बीडीसी सदस्य पूरन सिंह बिष्ट को जिला संगठन मंत्री, गांव तोता बेरिया निवासी जागन सिंह को ब्लॉक उपाध्यक्ष, अच्छन खां को ग्राम सभा मुंडिया कलां का अध्यक्ष बनाने की घोषणा की गई। बैठक के बाद किसानों ने कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर नारेबाजी की। वहां मोहम्मद अहमद, अनिल कांबोज, ओमप्रकाश, राधेश्याम यादव, राजेंद्र कांबोज, प्रभशरण सिंह आदि थे।
उधर, सितारगंज में कृषि कानूनों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्व विधायक नारायण पाल ने कांग्रेसियों व किसानों के साथ मुख्य चौराहे पर कटोरा लेकर भीख मांगी और प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि भीख से एकत्र प्रधानमंत्री केयर फंड में जमा कराई जाएगी ताकि इस रकम से पीएम नरेंद्र मोदी उद्योगपतियों की मदद कर सकें।
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बृहस्पतिवार को पूर्व विधायक ने कांग्रेसियों व किसानों के साथ मुख्य चौराहे पर धरना दिया। सभी ने कटोरा लेकर नागरिकों से भीख मांगी। पाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसान विरोधी कानून बनाकर अपनी अंबानी और अडानी जैसे उद्योगपतियों की सरकार होने की मंशा जाहिर की है। आर्थिक तंगी के कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं लेकिन किसानों के हित में कोई कानून नहीं बनाया। भीख से एकत्र चंदे को प्रधानमंत्री केयर फंड में जमा कराया जाएगा ताकि पीएम इस चंदे से अंबानी, अडानी और अन्य पूंजीपतियों की मदद कर सकें। इस दौरान केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया और सरकार को कोसा। वक्ताओं ने कहा कि तानाशाह की इस सरकार में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। वहां किसान गुरप्रीत सिंह देओल, हाजी अनवार अहमद, रामनगीना प्रसाद, गुरदयाल सिंह, दयानंद सिंह, गंगासागर, जसवंत सिंह, सतवंत सिंह, बलवीर सिंह बल्ली, जसप्रीत सिंह, हरिंदर सिंह, अंकुर आर्य, इश्तियाक अंसारी, प्रमोद नेगी, जीत सिंह, बक्शीश सिंह, देवेंद्र राणा, सूरज राणा, ताबीर मलिक, जावेद सिद्दीकी, गुरमुख सिंह, हरजीत सिंह, हसनैन मलिक, हरप्रीत सिंह आदि थे।
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