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किसान ही नहीं मजदूर और मेहनकश जनता के खिलाफ हैं नए कानून

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यूपी के गाजीपुर बार्डर पर चल रहे धरने में शामिल यूएस नगर के किसान। - फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। श्रमिक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में मजदूरों और किसानों ने धरना दिया और सभा की। उन्होंने केंद्र सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
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बृहस्पतिवार को शुक्ला पार्क में हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश के मजदूरों-किसानों के खिलाफ कृषि कानून बनाकर उनका शोषण तेज करने की अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। पंजाब, हरियाणा, यूपी और उत्तराखंड के किसान पिछले आठ दिनों से दिल्ली के बॉर्डरों पर धरना दे रहे हैं लेकिन सरकार किसानों का दमन करने पर आमादा है। आरोप लगाया कि किसानों के खिलाफ बनाए गए कानून सिर्फ किसानों के ही नहीं बल्कि मजदूर और मेहनतकश जनता के भी खिलाफ हैं। सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली से हाथ खींचने की मंशा भी इसके तहत साफ है। कहा कि यदि किसानों की मांगों का समाधान नहीं होता है तो पांच दिसंबर को उद्योगपतियों और सरकार के गठजोड़ का पुतला दहन किया जाएगा। सभा से पूर्व भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों की याद में दो मिनट का मौन रखा गया। वहां श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी, मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान मासा के सुरेंद्र, भारतीय किसान यूनियन के तरनजीत सिंह, इंकलाबी मजदूर केंद्र के दिनेश, मजदूर सहयोग केंद्र के मुकुल, अखिल भारतीय किसान महासभा के आनंद सिंह नेगी, भाकपा माले के ललित मटियाली, भारतीय किसान यूनियन के अक्षय बाबा,दलजीत सिंह, दिलजोत बाजवा, विक्रम संधू, शरण पुरेवाल, अकरम खान, चंदन मेवाड़ी, पूरन पांडे, महेंद्र सिंह, धीरज जोशी आदि थे।
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