अनाज मंडी में धान की बोली न लगाने और धान क्रय केंद्र पर खरीद न होने पर किसान भड़क गए। उन्होंने मंडी गेट के सामने हाइवे पर जाम लगा दिया। डेढ़ घंटा तक लगे जाम के कारण सड़क के दोनों ओर कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लग गईं। पुलिस और किसी प्रशासनिक अधिकारी के नहीं पहुंचने पर किसान उग्र हो गये। बाद में तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह किसानों को समझाबुझाकर जाम खुलवाया।
मंगलवार सुबह साढ़े 11 बजे मंडी गेट पर किसानों ने जाम लगा दिया। जाम लगाने वाले अधिकांश किसान उत्तराखंड की सीमा से लगे गांवों से अपनी उपज बेचने आए थे। किसानों ने आरोप लगाया कि चावल मिल मालिकों और आढ़तियों की मिलीभगत से किसानों का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। आढ़ती किसान की फसल फड़ों पर पलटवा लेते हैं और जानबूझकर बोली नहीं करते। जब धान दो तीन दिन में गरम हो जाता है तो महंगे धान को 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य पर बेचने पर मजबूर कर देते हैं। मंगलवार को कुछ चावल मिल मालिक आए और मंडी में एक घंटा बोली कर चलते बने, जबकि पूरी मंडी धान से भरी पड़ी है। हाइवे पर जाम लगने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। जाम लगने के लगभग डेढ़ घंटा बाद तहसीलदार गोपाल राम मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों से वार्ता कर जाम खुलवाया। उन्होंने किसानों को व्यवस्था शीघ्र ठीक होने का आश्वासन दिया।
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पानी के लिए भी तरस गए जाम में फंसे लोग
किच्छा। मंगलवार को हाइवे पर किसानों द्वारा जाम लगाए जाने की सूचना के बावजूद डेढ़ घंटा तक पुलिस भी मौके पर नहीं पहुंची। जाम में कई रोडवेज बसें फंसी रहीं। बड़ी तादाद में नैनीताल और नानकमत्ता की ओर जाने वाले पर्यटक जाम में फंसे रहे। भीषण गर्मी के कारण लोग पानी के लिए तरस गए, लेकिन कोतवाली या पुलभट्टा से कोई पुलिसकर्मी नहीं पहुंचा। पुलभट्टा थानाध्यक्ष मोहन चंद पांडे तब पहुंचे जब जाम खुल चुका था।
क्रय केंद्र खुले, लेकिन खरीद शुरू नहीं
किच्छा। तहसीलदार गोपाल राम आर्य ने बताया कि मंडी में तीन और क्षेत्र में सात क्रय केंद्र खोले गए हैं। बताया कि सब जगह बारदाना भी आ चुका है, लेकिन अभी तक किसानों की सूची नहीं होने से खरीद शुरू नही की गई। आरएफसी के धान क्रय अधिकारी नरेश चौहान ने बताया कि उनके केंद्र पर अभी तक खरीद शुरू नही हुई।
किसानों का शोषण बंद नहीं हुआ तो होगा आंदोलन
कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री हरीश पनेरू ने कहा कि अधिक बरसात के कारण किसान को अत्यधिक नुकसान हुआ है। सरकार को प्रदेश को आपदाग्रस्त घोषित कर किसानों को मदद देनी चाहिये। चेतावनी दी कि अगर बिचौलियों और अधिकारियों की साठ-गांठ पर अंकुश लगाकर धान क्रय केंद्र नहीं खोले गए तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।