। सात दिन से लापता नौगवांठग्गू निवासी जनजाति के किसान राज किशोर राणा का शव ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने गांव के बाहर लोहिया नाले से बरामद किया। मृतक के मोबाइल एवं शरीर पर कपड़ों से परिजनों ने शिनाख्त की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। कोतवाली के बाहर एकत्रित ग्रामीणों और परिजनों ने शव वाले वाहन को रोक कर ढाई घंटे जाम लगाया और प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने मृतक की हत्या कर शव को नाले में फेंकने का आरोप लगाया है जबकि पुलिस इस मामले को सुसाइड मान रही है।
ग्राम नौगवांठग्गू निवासी राज किशोर राणा पांच अक्तूबर से लापता था। परिजन बताते हैं कि वह रतनपुर स्थित अपने खेत के धान देखने की बात कहकर गया था। बुधवार को उसकी लाश लोहिया नाले से मिली। मृतक के परिजन बताते हैं कि उसकी 14.11 बीघा जमीन खरीदने वाले सूरज चंद के हत्या के आरोप में जेल गए ललित ज्याला ने उसको पूरा पैसा नहीं दिया। लगभग 35 लाख देने की बात कहकर रतनपुर निवासी मनोज चंद से सात बीघा जमीन लिखवाई थी। इसमें उसने धान बोया था। बाद में उसने रुपये नहीं मिलने पर धान काट लिया। राजकिशोर उसी खेत को देखने पांच अक्तूबर को गया था। बुधवार सुबह उसकी लाश मिली।
ग्राम नौगवांठग्गू के पीछे पटिया मार्ग पर बहने वाला लोहिया नाला गांव का पनघट है। ग्रामीण बताते हैं कि जिस स्थान पर बुधवार सुबह राज किशोर का शव मिला वहां मंगलवार शाम तक शव नहीं था। इस नाले में इतना पानी नहीं है कि उसमें कोई शव बहकर किनारे आ सके। पुलिस का आत्महत्या का दावा ग्रामीणों के गले नहीं उतर रहा है।
नौगवांठग्गू निवासी राज किशोर राणा की मौत को पुलिस आत्महत्या का मामला मान रही है। पुलिस का दावा है कि पांच अक्तूबर को दो कॉल की लोकेशन 7.56 मिनट पर मिली है, वह उसके घर की है। उसके बाद मोबाइल स्विच आफ हो गया। स्विच आफ होते समय मृतक के घर पर रतनपुर में मनोज चंद द्वारा सात बीघा भूमि पर धान की फसल काटने के संबंध में बैठक चल रही थी। बैठक में आगे की कार्रवाई के सिलसिले में सलाह मशवरा चल रहा है। एसएसआई जगदीश ढकरियाल ने बताया कि यद्यपि मृतक के परिजनों ने बैठक करने की उन्हें कोई जानकारी नहीं दी लेकिन बैठक में मौजूद लोगों ने बताया कि बैठक बेनतीजा रही। बैठक में बमुश्किल आया राज किशोर राणा मानसिक रूप से परेशान था। उसके अनुसार उसकी 14.11 बीघा जमीन गई और उसे कुछ भी नहीं मिला। एसएसआई ढकरियाल ने कहा कि मृतक के परिजनों ने एक ही जानकारी दी कि धान के खेत देखने की बात कहकर वह रतनपुर गया था।
नौगवांठग्गू निवासी राज किशोर ने ललित ज्याला से अपनी 14.11 बीघा जमीन का सौदा 18 लाख की दर से ढाई करोड़ रुपये में सौदा किया था। ज्याला ने अपने पार्टनर पूरन जोशी के साथ ग्राम भूड़ व नौगवांठग्गू के बीच ग्रीन पार्क के नाम से भव्य कालोनी बनाने की योजना बनाई थी।
सूरज चंद हत्याकांड में जेल गए ज्याला ने राज किशोर को 50 लाख नकद दे दिए थे। उसमें 45 लाख रुपये इनकम टैक्स का नोटिस दिखाकर हड़प लिए जो कि ज्याला पुलिस की मदद से फर्जी इनकम टैक्स का नोटिस निकालकर जमीन विक्रेता से हड़पता था। इसी नोटिस को दिखाकर 50 लाख में से 45 लाख रुपये की रकम हड़प ली। शेष बची रकम में मनोज चंद की सात बीघा जमीन 35 लाख में राजकिशोर के नाम कागज बना दिए। इस बीच ज्याला जेल चला गया तो बाकी बचे सवा करोड़ की रकम अटक गई।
ज्याला के जेल के बाद जब पूरन जोशी के हाथ कमान आयी तो उसने नए सिरे से सौदा किया। तब एक बार फिर सौदा 18 की जगह 14 लाख 13 हजार रुपये प्रति बीघा में तय किया गया। पूरन ने ज्याला के हिसाब को अपनी तरफ लगाते हुए राजकिशोर को शेष 95 लाख और देना तय किया। पूरन जोशी ने ग्रीन पार्क में अपना स्वामित्व जमा लिया। इधर रतनपुर निवासी मनोज चंद को अपनी सात बीघा जमीन मुुफ्त में जाती प्रतीत होने लगी। इस पर उसने ललित ज्याला के सौदे को इनकार करते हुए धान काटकर कब्जे का प्रयास किया। मृतक के भाई भीकम सिंह राणा ने इस प्रकरण में भू-माफियाओं का हाथ बताया है।