रुद्रपुर। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के आह्वान पर आठ सूत्री मांगों के लिए कलक्ट्रेट कूच करने पहुंचे किसानों और पुलिस के बीच जमकर तनातनी हुई। पुलिस-प्रशासन के रास्ता रोकने पर आक्रोशित किसानों ने बैरिकेड तोड़ दिए और पुलिस से धक्का-मुक्की की जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद किसानों ने कलक्ट्रेट के मुख्य गेट पर ही डेरा डालकर तीन दिवसीय धरना और लंगर शुरू कर दिया। इस दौरान किसानों ने हाईवे पर करीब आधे घंटे तक जाम लगा दिया जिसके चलते मार्ग को वन-वे करना पड़ा ।
शुक्रवार को किसानों के आह्वान को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही कड़ी नाकेबंदी कर रखी थी। कलक्ट्रेट के चारों ओर बांस की बल्लियां बांधकर बैरिकेड लगाए गए थे और रास्ते पर बुलडोजर खड़े कर दिए थे। बावजूद इसके सैकड़ों की संख्या में किसान पहुंच गए और उन्होंने बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने का प्रयास किया। रास्ता रोकने पर किसान उग्र हो गए और दोनों ओर से धक्का-मुक्की शुरू हो गई। नैनीताल हाईवे के तरफ से बांस की एक लेयर बैरिकेट तोड़कर किसान आगे बढ़े लेकिन पुलिस ने उन्हें दूसरे गेट पर ताला जड़कर रोक लिया। माहौल तनावपूर्ण होने पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा।
अंत में यह तय हुआ कि किसान अब यहीं पर अपना तीन दिवसीय धरना करेंगे जिसके बाद बंद गेट के बाहर किसान धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह सहोता ने कहा कि तीन दिन तक किसान अपनी मांगों को लेकर यहीं पर धरना देंगे। इस दौरान विक्रम सिंह, विक्रमजीत सिंह, पलविंदर सिंह मनेरा, विक्रम सिंह रंधावा, जितेंद्र सिंह जित्तू, हरप्रीत सिंह निज्जा, जगतार सिंह बाजवा, हरविंदर सिंह आदि मौजूद रहे।
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नैनीताल हाईवे किया जाम, फिर धरने पर बैठे किसान
एंबुलेंस भी फंसी, वन वे चला यातायात
सिडकुल की ओर से किसान रिंग रोड होते हुए ट्रैक्टर-ट्राॅलियों से कलक्ट्रेट की ओर बढ़े। मेट्रोपॉलिस माॅल के पास थ्री लेयर बैरिकेड पर उन्हें रुकना पड़ा। इसके बाद आक्रोशित किसानों ने हाईवे पर बैठकर ही धरना शुरू कर दिया। एक घंटे चले धरने से हाईवे अवरूद्ध हुआ। सिडकुल चौक के पास से लेकर अटरिया मोड़ तक हाईवे को वन-वे करना पड़ा। धरना प्रदर्शन के दौरान एक एंबुलेंस समेत कई वाहन आधा घंटे तक फंसे रहे। इससे यात्रियों और वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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ये हैं किसानों की मांगें
- किसानों के सभी ट्यूबवेलों का पूरा बिजली बिल माफ किया जाए और सभी घरेलू मीटरों की प्रतिमाह 300 यूनिट बिजली मुफ्त की जाए।
- किसानों का संपूर्ण कर्जा माफ होना चाहिए।
- पहाड़ी जिलों के किसानों को हिल भत्ता प्रतिमाह 20 हजार रुपये दिया जाए क्योंकि वह बॉर्डर की सुरक्षा का भी कार्य करते हैं।
- बाजपुर के 20 ग्रामों की भूमि पर किसानों के खाद, ऋण, क्रय-विक्रय पर लगी रोक हटाई जाए। किसानों को पूर्ण अधिकार दिए जाएं।
- काशीपुर बंद पड़ी चीनी मिल का वर्ष 2007 का करीब एक करोड़ रुपये और वर्ष 2011-12 का 25 करोड़ रुपये किसानों को तत्काल दिलाया जाए।
- प्रदेश में तत्काल प्रभाव से स्मार्ट मीटर लगाना बंद किए जाएं और जो लगे हैं उन्हें विभाग की ओर से हटाया जाए।
- किसानों के गन्ने का मूल्य 700 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
- किसानों की सभी वर्गों की भूमि का हक काबिज किसानों को दिया जाए।