जिले की एक लाख, 43 हजार, 296 हेक्टेयर कृषि भूमि पर एक लाख, दो हजार, 971 किसान दिनभर पसीना बहाते हैं। तराई को यदि धान का कटोरा कहा जाता है तो यह किसानों की अथक मेहनत का ही प्रतिफल है। लेकिन जब किसानों को उनकी मेहनत का फल देने की बारी आती है तो सरकारें मुंह फेर लेती हैं।
जिले में इस वर्ष 25 लाख क्विंटल से अधिक धान की रिकॉर्ड खरीद के बावजूद किसानों को धान के भुगतान के लिए तरसना पड़ रहा है। खरीफ विपणन सत्र को डेढ़ माह से अधिक समय बीत चुका है लेकिन किसानों को अभी तक पूरा भुगतान नहीं हो सका है। धान का भुगतान न हो पाने के कारण किसान कृषि ऋण का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं।
धान के साथ ही गेहूं और गन्ना के मूल्य का अब तक भुगतान नहीं होना तराई के किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्याओं के रूप में खड़ा है। गन्ना मिलों में समय से पेराई सत्र शुरू नहीं होने के कारण किसान समय पर गेहूं की बुवाई नहीं कर पाते हैं। खेतों में गन्ना पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है। कृषि कानूनों के खिलाफ तराई के सैकड़ों किसान गाजीपुर बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। बुधवार को किसान दिवस है। प्रदेेश के प्रमुख कृषि उत्पादक ऊधमसिंह नगर जिले के किसानों को खेती में आ रही चुनौती और अन्य मुद्दों पर अमर उजाला ने बातचीत की।
धान का भुगतान और चीनी मिलों में गन्ने की सप्लाई न होने से दिक्कतें आ रही हैं। खेतों में गन्ना पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है। इससे गेहूं की बुवाई नहीं हो पा रही है। - कुंवरपाल दहिया।
सरकार अपने वादे के अनुरूप धान का भुगतान नहीं कर रही है। सरकार किसानों की लगातार उपेक्षा कर रही है। कृषि कानूनों के खिलाफ 25 दिसंबर किसान दिल्ली कूच करेंगे। - करम सिंह पड्डा।
जिले में इस वर्ष धान की रिकॉर्ड खरीद हुई लेकिन डेढ़ महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद किसानों को अब तक धान का भुगतान नहीं किया गया है। किसानों की उपेक्षा की जा रही है। - एसके चौधरी।
धान और चीनी के मूल्य का समय पर भुगतान न होना हमेशा से प्रमुख समस्या रहा है। सरकार को चाहिए कि किसानों की दोनों समस्याएं दूर करे। ताकि युवा पीढ़ी भी खेती जुड़ सके। - जगदीश सिंह।
जगदीश सिंह।- फोटो : RUDRAPUR
करम सिंह पड्डा।- फोटो : RUDRAPUR
कुंवरपाल दहिया।- फोटो : RUDRAPUR