खटीमा। कर्ज न चुका पाने पर आत्महत्या करने वाले किसान रामअवतार को कर्ज विरासत में मिला था। पिता रामप्रसाद की मौत के बाद रामअवतार और उसके तीन भाइयों में जब बंटवारा हुआ तो उनके हिस्से में ढाई-ढाई एकड़ जमीन के साथ तीन-तीन लाख रुपये का कर्ज भी आया। उनके पिता ने ट्रैक्टर आदि चीजों के लिए लोन लिया था।
रामअवतार के छोटे भाई पूर्व प्रधान अनंत राम ने बताया कि चारों भाइयों को बंटवारे में जमीन तो मिली लेकिन तीन-तीन लाख रुपये बैंकों, साहूकारों का कर्ज भी मिला, जिसे उनके पिता ने लिया था। वर्ष 1998 में उनके पिता की मौत के बाद से उन भाइयों पर कर्ज चल रहा है। उन्होंने बताया कि उनके मृतक भाई पर एसबीआई, बीओबी, मझोला दीर्घाकार बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति का चार लाख, साहूकारों का चार लाख रुपये ऋण था। ढाई एकड़ जमीन में से तीन बीघा 50 हजार तो एक एकड़ सवा दो लाख रुपये में साहूकारों के पास गिरवी है।
एक एकड़ खेत में खेती, मजदूरी कर वह अपना गुजारा कर रहा था, लेकिन बैंक के दबाव के आगे वह टूट गया और उसने मौत को गले लगा लिया। पूर्व प्रधान ने बैंक को ही भाई की मौत के लिए जिम्मेदार बताया। मृतक किसान के अन्य भाइयों में पूर्व प्रधान पर सवा लाख, राजेंद्र पर तीन लाख का साहूकारों, बैंक का कर्ज है जबकि जगन्नाथ पर केवल 25 हजार रुपये का कर्ज है। जगन्नाथ की स्थिति में तब सुधार आया जब उनका एक पुत्र सरकारी नौकरी में लगा। पूर्व प्रधान ने बताया कि उनकी गेहूं की फसल दो बार जली, मगर उसका मुआवजा उन्हें नहीं मिला।
खटीमा। मृतक किसान रामअवतार और उसके तीन भाइयों अनंतराम, राजेंद्र, जगन्नाथ के पास खटीमा-पीलीभीत हाइवे में कंचनपुर पुलिस चौकी के पास 16 बीघा जमीन है। चारों भाइयों में इसमें से चार बीघा जमीन को बेच कर अपने बच्चों की शादी, बिजनेस, कर्ज उतारने को लेकर सहमति बनी थी। इसमें दो बीघा रामअवतार, तीनों भाई एक-एक बीघा जमीन बेच रहे थे। इसकी बात खटीमा के किसी व्यापारी से चल रही थी। अगर समय रहते यह सौदा हो जाता तो किसान की जान बच जाती।
खटीमा। फसल की उपज का सही दाम न मिलने, महंगी होती खेती किसानों को कर्जदार बना दिया है। किसान बैंकों के कर्जदार और साहूकारों के मकड़जाल में फंसे हैं। कंचनपुर पचपेड़ा के किसानों ने फसलों का उचित मूल्य न मिलने, खेती में लगातार बढ़ते खर्च को किसानों की खराब आर्थिक स्थिति के लिए जिम्मेदार बताया। पांच एकड़ के किसान मिठई लाल कहते हैं कि वर्तमान में अगर वह खेत में स्वयं मजदूरी करें तो एक एकड़ में आठ हजार रुपये खर्च आता है। बहुत कोशिश के बावजूद एक एकड़ में 20 हजार की फसल हो पाती है।
किसान को खेती में मजदूर लगाने पर खर्च दो गुना हो जाता है। लागत के हिसाब से फसल के दाम बेहद कम है। किसान हरिओम ने कहा कि उनके पास पांच एकड़ जमीन है। उन पर 12 लाख रुपये का ऋण है। जिसमें एसबीआई, सहकारी समिति, साहूकारों का ऋण शामिल है। किसान भीमसेन के पास भी पांच एकड़ जमीन है। उन पर भी बैंकों, साहूकारों का 12 लाख रुपये का बकाया है। किसान ओम प्रकाश के पास डेढ़ एकड़ जमीन है। उन पर चार लाख रुपये लोन है। रुपये की कमी के चलते अपने पुत्र का बीटेक में एडमिशन नहीं करा पाए। किसान ज्वाला प्रसाद के पास ढाई एकड़ जमीन है। उन पर बैंकों का साढ़े तीन लाख का कर्ज चल रहा है।
दहेज प्रथा ने भी किसानों को बनाया कर्जदार
खटीमा। सामाजिक बुराई दहेज प्रथा भी किसानों को कर्जदार बनाने में भूमिका निभा रही है। कंचनपुर पचपेड़ा के किसान दहेज रूपी सामाजिक बुराई को किसानों को कर्जदार बनाने के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। किसान कहते हैं कि कम पढ़े लिखे बेरोजगार दूल्हे पांच लाख रुपये से कम दहेज नहीं मांगते हैं। नौकरी वाला दूल्हा तो पढ़ाई से लेकर नौकरी तक का खर्च लड़की के माता-पिता से वसूल करना चाहता है। दहेज जुटाने में ही किसान कर्ज में डूब रहा है। मृतक किसान रामअवतार पर भी चार बेटियों के विवाह की जिम्मेदारी थी।
कर्ज माफी की आस में कर्ज के भंवर डूब रहे किसान
खटीमा। खटीमा क्षेत्र का किसान कर्ज माफी की उम्मीद में कर्ज के भंवर में डूबता जा रहा है। सहकारिता विभाग की चारों समितियों में कर्जदार किसानों की संख्या सैकड़ों में है। किसान सूदखोरों के मकड़जाल में भी फंस रहा है। उत्तरी दीर्घाकार बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति की सचिव अपर्णा ने बताया कि समिति में करीब तीन हजार सदस्य हैं। इनमें 50 फीसदी सदस्य ऋण चुकता नहीं कर पा रहे हैं।
मझोला दीर्घाकार बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति अध्यक्ष जसविंदर पप्पू ने बताया कि कि समिति ने 4500 सदस्यों में लगभग 1900 किसान अपनी किश्तें अदा नहीं कर पा रहे हैं। इस वर्ष 70 प्रतिशत वसूली स्थगित है। सहकारिता विभाग की झनकट एवं दक्षिणी सोसायटियों के बकाएदारों की स्थिति भी कमोबेश यही है।
किसान नेता प्रकाश तिवारी का आरोप है कि प्रदेश सरकार ने किसानों की घोर उपेक्षा की है। कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों का कर्जा माफ कर उन्हें राहत पहुंचाई है, लेकिन प्रदेश के किसान सूखे और महंगाई की मार से उबर नहीं पा रहे हैं। तिवारी ने चेतावनी दी है कि किसान की आत्महत्या की मजिस्ट्रेटी जांच नहीं हुई तो वह बृहस्पतिवार से आंदोलन शुरू किया जाएगा।
किसान नेता सेवा सिंह ने कहा कि खाद, बीज, सूखे की मार से त्रस्त किसान ऋण अदायगी में असमर्थ है। किसानों को वर्ष सितारगंज चीनी मिल से 2015-16 का 18 करोड़ का भुगतान अभी नहीं हुआ है। इसमें 10 करोड़ खटीमा के किसानों का है। वर्ष 16-17 में 23 करोड़ के बकाए में खटीमा के किसानों का 14 करोड़ मूल्य के गन्ने का भुगतान नहीं हुआ है। किसान सहकारी समिति के अलावा बैंकों और साहूकारों के कर्ज के बोझ से दबते जा रहे हैं। सरकारी राहत की घोषणा तक किसानों का कर्जे से उबरना संभव नहीं है।