नानकमत्ता। नगर पंचायत के चेयरमैन ने अधिशासी अधिकारी पर फर्जी तरीके से लिपिक पद पर नियुक्ति पाने का आरोप लगाया। शहरी विकास मंत्री को पत्र लिखकर उनकी नियुक्ति रद्द कर उन्हें बर्खास्त करने और लिए गए वेतन की रिकवरी करने की मांग की। ईओ ने आरोपों को निराधार बताया है।सोमवार को नगर पंचायत कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अध्यक्ष प्रेम सिंह टुरना और सभासदों ने कहा कि ईओ ने वर्ष 2002 में खटीमा नगर पालिका में सिर्फ एक प्रार्थना पत्र देकर बिना किसी रिक्त पद के लिपिक पद पर नियुक्ति हासिल की थी। वर्ष 2014 में तत्कालीन एसडीएम खटीमा की ओर से की गई लिपिक की नियुक्ति की जांच में इसका खुलासा हुआ। उन्होंने इसकी जांच डीएम को सौंपी थी। इसके बाद जिलाधिकारी ने सचिव शहरी विकास विभाग को लिपिक को अवैध नियुक्ति के संबंध में कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा था। लेकिन वर्ष 2014 की जांच आख्या के बाद भी 12 साल बाद भी लिपिक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। कहा कि नगर पंचायत नानकमत्ता में पद ग्रहण करके बाद ईओ ने ठेकेदार से मिलीभगत कर शासनादेश के विरुद्ध शर्तों और नगर पंचायत को गुमराह कर टेंडर निकाल दिया। शिकायत के बावजूद चहते ठेकेदार को डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का ठेका दे दिया। वहां पर सभासद गौरव वर्मा, सभासद सुरंजन राय, सभासद विशाल गोयल आदि थे।
धरना जारी
नगर पंचायत के ईओ को तत्काल हटाने की मांग के लिए सभासदों और पर्यावरण मित्रों का अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन भी जारी रहा। पर्यावरण मित्रों की हड़ताल के चलते नगर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लग गए हैं। कूड़े की ढेर से उठती दुर्गंध से नगरवासियों और राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
फर्जी नियुक्ति के सभी आरोप गलत है। तीन-तीन आवेदकों में से मेरी नियुक्ति वर्ष 2002 में खटीमा के निवर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष ने की थी। नगर पालिका परिषद के तत्कालीन प्रशासक एसडीएम ने मेरी नियुक्ति को गलत बताया था। तत्कालीन शहरी विकास मंत्री के आदेश पर पुनः नियुक्ति हुई। वर्ष 2015 में हाईकोर्ट गया था, 2017 में उच्च न्यायालय ने मेरे पक्ष में निर्णय दिया था। 2017 से में कई बार नगर पंचायत में प्रभारी ईओ रहा। 2021 में शासनादेश के चलते ही लगातार अधिशासी अधिकारी के रूप में कार्यरत हूं।-
राकेश कोटिया, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत नानकमत्ता