जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने नैनीताल रोड पर हुए अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया। बुधवार को चलाए गए अभियान से अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया। संयुक्त टीम ने लगभग आधा दर्जन अवैध कच्चे निर्माण ढहा दिए। अतिक्रमण हटाने की भनक मिलते ही लोगों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया। टीम ने कई लोगों का सामान भी जब्त कर लिया, जबकि कइयों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
नैनीताल रोड पर सड़क के दोनों किनारों पर अवैध अतिक्रमण पर जिला प्रशासन गंभीर हो गया है। डीएम अक्षत गुप्ता के निर्देश पर बुधवार को जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम सड़क पर उतर आई। एसडीएम एपी बाजपेई की अगुवाई में चले अभियान की शुरूआत अटरिया मोड़ से की गई जहां पर तकरीबन चार खोखों को ध्वस्त कर दिया।
इसके बाद टीम ने कई और खोखों को भी ध्वस्त कर दिया। नैनीताल रोड पर एचडीएफसी बैंक के पास के अतिक्रमण को भी जेसीबी ने ध्वस्त कर दिया। इतना ही नहीं सड़क किनारे लगे सरकारी बोर्ड को भी जब्त कर लिया गया। टीम अतिक्रमण हटाते हुए डीडी चौक पहुंची जहां पर कुछ निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया। श्रीगुरु अंगददेव कांपलेक्स के बाहर खड़ी ठेलियों का हटाया गया। टीम ने इस दौरान कई लोगों के सामान भी जब्त किए।
हाईवे किनारे रखे गए बड़े जनरेटर भी हटेंगे
सड़क किनारे बने फड़ खोखों को जहां ध्वस्त कर दिया गया, वहीं एचडीएफसी बैंक के आसपास कई लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण को भी टीम जल्द हटाएगी। साथ ही हाईवे के किनारे बड़े-बड़े होटलों और रेस्टोरेंटों ने अपने जनरेटर रखे हैं उसके लिए जिला प्रशासन ने नगर निगम को नोटिस भेजा है कि तत्काल उनके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जाए। एसडीएम एपी बाजपेई ने बताया कि नैनीताल हाईवे किनारे कई बड़े प्रतिष्ठानों के स्वामियों ने बड़े-बड़े जनरेटर रखकर कब्जा किया है, जिसे जल्द हटाने के लिए नगर निगम को कहा गया है।
अवैध कब्जेदारों ने नालियां भी पाट दीं
सड़क किनारे पर कब्जे की होड़ इस कदर मची हुई है कि कब्जेदारों ने नालियों को भी पाट दिया है। लकड़ी के फट्टे डालकर उस पर फड ठेलियां डालकर नालियों को चोक कर दिया है जिस कारण से पानी की निकासी ही बंद हो गई है।
कभी संजीदा नहीं रहा नगम निगम
शहर में बढ़ते अतिक्रमण को नगर निगम कभी भी संजीदा नजर नहीं आया। सड़क के किनारों पर कब्जे होते रहे लेकिन निगम प्रशासन मूक दर्शक बन देखता रहा। जिस स्थान पर बुधवार को अभियान चलाया गया वहां पर लोग वर्षों से काबिज हैं, लेकिन न तो जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई हुई और ना ही निगम प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया।