रुद्रपुर। इस बार बजट में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए शी-मार्ट मॉडल लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य घरों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे स्तर पर काम कर रही महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद बेचने के लिए अलग से संगठित स्थान उपलब्ध कराना है। अभी तक अधिकतर महिलाएं अपने सामान की बिक्री के लिए मेलों, अस्थायी स्टॉल या परिचित नेटवर्क पर निर्भर रहती थीं, जिससे उनकी पहुंच सीमित रह जाती थी।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत शहरों और कस्बों में ऐसे आउटलेट विकसित किए जाने की योजना है जहां हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, सजावटी सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। इससे ग्राहकों को तमाम विकल्प मिलेंगे और महिलाओं को नियमित खरीदारों से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा।
जानकारों के मुताबिक जब उत्पादक और उपभोक्ता के बीच सीधा संपर्क बनेगा, तो मूल्य निर्धारण अधिक न्यायसंगत होगा और लाभ का बड़ा हिस्सा सीधे निर्माताओं तक पहुंचेगा। इस पहल का एक अन्य सकारात्मक पक्ष स्थानीय पहचान का निर्माण भी माना जा रहा है।
अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक कला, स्वाद और डिजाइन को एक व्यवस्थित मंच मिलने से वे केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि व्यावसायिक रूप से भी उभर सकेंगे। कुल मिलाकर, यह पहल महिलाओं को उपभोक्ता बाजार में भागीदार से आगे बढ़ाकर निर्णायक भूमिका में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
अगर स्थानीय स्तर पर स्थायी रिटेल स्पेस मिलेगा तो हमारे उत्पादों की बिक्री नियमित हो सकेगी। इससे आय बढ़ेगी और घर से ही काम करने वाली महिलाओं को बड़ा सहारा मिलेगा। -
ज्योति मंडल।
- अब मेलों और अस्थायी स्टॉल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, यह सबसे बड़ी राहत है। स्थायी आउटलेट होने से भविष्य की कमाई को लेकर आत्मविश्वास बढ़ेगा। -
सुनीता कश्यप
- डिजिटल भुगतान और प्रशिक्षण जुड़ने से महिलाओं का कारोबार और पेशेवर बनेगा। यह पहल छोटे स्तर के काम को भी बड़े बाजार तक पहुंचाने में मददगार साबित हो सकती है।
- बबली कोरंगा
- शी-मार्ट जैसे मंच से हमारी कला को पहचान मिलने की उम्मीद है। सीधे ग्राहकों से जुड़ने पर सही दाम और भरोसा दोनों मिलेंगे।
- पूनम चौहान।