‘एक पल को लगा कि अब सब कुछ खत्म, लेकिन अगले ही पल विमान के एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड होते ही सभी ने राहत की सांस ली। यात्रियों के मुताबिक अगर विमान काफी ऊंचाई और एयरपोर्ट से ज्यादा दूर होता तो बड़े हादसे की आशंका बलवती हो जाती। इमरजेंसी लैंडिंग के बाद भी कई यात्री अब भी दहशत में हैं। इन यात्रियों ने नागर विमानन महानिदेशालय और हवाई सेवा प्रदाता कंपनी से सुरक्षा को लेकर इंतजाम में मजबूती लाने की मांग की है।
शनिवार को विमान से पिथौरागढ़ के लिए हल्द्वानी के निजी प्लास्टिक सर्जन डॉ. लोकेश बोरा ने बताया कि विमान में तीन महिला और दो बच्चों समेत कुुल आठ यात्री सवार थे। बकौल डॉ. बोरा वह दरवाजे के ठीक वाली सीट पर बैठे थे, लेकिन एक परिवार ने बच्चे को गोद में बिठा लिया था, इस वजह से वह आगे वाली सीट पर बैठ गए थे। उड़ान भरने के कुछ पल बाद अचानक विमान का दरवाजा तेज आवाज के साथ खुला और भीतर आए प्रेशर से विमान तेजी से हिलने लगा। यह देख सभी यात्री दहशत में आ गए और बच्चे और महिलाएं चीखने लगी। विमान पंतनगर से थोड़ा ही दूर गया था, लिहाजा उसे वापस पंतनगर में उतारा गया। विमान के लैंड होने तक दरवाजा खुला था और दरवाजा बंद करने में उन्होंने को-पायलट की मदद की थी। इसके बाद विमान को सुरक्षित रनवे पर उतारा गया। डॉ. बोरा ने बताया कि अगर दरवाजे के सामने वाली सीट पर कोई यात्री बैठा होता तो वह नीचे गिर सकता था। इधर पिथौरागढ़ निवासी और व्यापारी पंकज चंद ने बताया कि वह पत्नी अमिषा, आठ साल के बच्चे अर्णव के साथ विमान में थे। विमान में पिथौरागढ़ विद्युत विभाग में तैनात मुकेश सिंह, उनकी पत्नी ममता के अलावा कुल आठ यात्री थे।
मुकेश सिंह ने बताया कि दस मिनट तक यात्रियों की जान सांसत में रही। डर के मारे सभी का बुरा हाल था। पिथौरागढ़ के लिए लाइफलाइन शुरू हुई है। लेकिन कंपनी को यात्रियों की सुरक्षा का विशेष ख्याल रखना चाहिए।