खटीमा वन रेंज के अंतर्गत चकरपुर कस्बे से सटे जंगल में टस्कर ने एक ग्रामीण को कुचलकर मार डाला। इससे आसपास के ग्रामीणों में दहशत है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। चकरपुर बिल्हरी निवासी चंचल सिंह मौनी (40) पुत्र स्व. नरेंद्र सिंह बुधवार को वनखंडी महादेव शिव मंदिर में आयोजित भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर रात नौ बजे लौट रहा था। इसी समय चकरपुर पुलिस चौकी के पास टनकपुर हाइवे से 50 मीटर अंदर जंगल में टस्कर ने चंचल के पेट और पैर को कुचल दिया, जिससे उसके मौत हो गई।
बृहस्पतिवार सुबह स्थानीय लोगों ने चंचल के शव को देखकर वन विभाग और पुलिस को सूचना दी। मृतक चंचल के भाई भूपेंद्र सिंह मौनी, मां मुन्नी देवी और अन्य रिश्तेदार मौके पर पहुंचे। चंचल के शव को देख मां मुन्नी देवी और चचेरी बहनें बेहोश हो गईं। ग्राम प्रधान संदीप राणा, बाजार चौकी इंचार्ज अनिल कुमार चौहान, वन दरोगा कमालुद्दीन, राकेश राणा, जागेश वर्मा आदि भी मौके पर पहुंचे। बताया कि चंचल के दो बड़े भाई उत्तम मौनी, भुवन मौनी हैं। बताया कि चंचल कई वर्षों से अलग रहता था और कोई काम न होने के कारण कम ही घर आता था। उसकी शादी आठ-नौ साल पहले हुई थी, लेकिन पत्नी अलग रहती है।
कोट
- टस्कर पर नजर रखी जा रही है, जिसका मूवमेंट क्षेत्र में तेजी से हो रहा है। संवेदनशील क्षेत्र में हाथी सुरक्षा दीवार बनाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। साथ ही मृतक के परिवार को मुआवजा दिलाने की तैयारी की जा रही है।
- बीएस बिष्ट, रेंजर, खटीमा
इनसेट
सप्ताह भर से थी टस्कर की गतिविधि
खटीमा। चकरपुर से सटे खटीमा रेंज के उत्तरी बनबसा कक्ष छह से आठ तक के जंगल में टस्कर की आवाजाही सप्ताह भर से हो रही है। टस्कर पंथागोठ में एक छप्पर को तोड़ चुका है। चकरपुर पुलिस चौकी के पास और हाईवे पर दो-तीन दिनों में कई बार टस्कर नजर आ चुका है। बुधवार को ही खटीमा रेंजर बीएस बिष्ट ने बताया था कि ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए कहा जा रहा है और रात में ही टस्कर ने ग्रामीण को मौत के घाट उतार दिया। ग्राम प्रधान संदीप राणा, ग्रामीण शंकर सिंह, राजेंद्र सिंह, भूपेंद्र आदि ने वन विभाग से टस्कर के आतंक से निजात दिलाने की मांग उठाई।
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पिछले पांच वर्ष में हाथी के हमले में मौत की तीसरी घटना
हाथी सुरक्षा दीवार बनाने की मांग मुखर
खटीमा। किलपुरा रेंज से हाथियों का झुंड खटीमा रेंज के उत्तरी बनबसा कक्ष छह से आठ होकर नखाताल जंगल से नेपाल की ओर निकलता है। एक सप्ताह से एक टस्कर जंगल में झुंड से अलग होकर घूम रहा है। चकरपुर कस्बे से सटे क्षेत्र में हाथी सुरक्षा दीवार बनाई गई होती तो इस तरह की घटनाओं पर कुछ अंकुश लग सकता था। रेंज में पांच वर्षों में हाथी के हमले में मौत का यह तीसरा मामला सामने आया है। ग्रामीण हाथी सुरक्षा दीवार की मांग कर रहे हैं।
वन विभाग के अनुसार रेंज से हाथियों के झुंड चकरपुर कस्बे से सटे वन रावत बस्ती के पास जंगल में अक्सर नजर आते रहे हैं। एक ओर टनकपुर हाईवे व दूसरी ओर रेलवे लाइन को क्रास कर झुंड निकलते हैं। सूत्रों की मानें तो वर्ष 2015-16 में सुरक्षा दीवार का प्रस्ताव पर कुछ विचार हुआ था। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार रेंज में 16 अक्तूबर 2014 को चकरपुर वनरावत बस्ती निवासी कृष्णानंद भट्ट,