काशीपुर। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) ने तीन दिनी प्रबंधन शिक्षा और अनुसंधान संगोष्ठी (एमईआरसी-2025) का आयोजन किया। संगोष्ठी का विषय एआई युग में सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति था। इस कार्यक्रम में दो सौ से अधिक शोधार्थियों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर, आईआईएम अहमदाबाद के प्रो. विशाल गुप्ता ने कहा कि हम नेतृत्व और सतत शिक्षा के भविष्य की कल्पना करते हैं तो हमें मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और खुशी जैसे पहलुओं को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानना होगा क्योंकि यह प्रभावी नेतृत्व की आधारशिला हैं।
आईआईएम ने अपने शैक्षणिक सम्मेलन के पांचवें संस्करण में प्रबंधन शिक्षा और अनुसंधान संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें आईआईएम लखनऊ, कोझिकोड, इंदौर, रायपुर और उदयपुर, आईआईटी दिल्ली, खड़गपुर, रुड़की, धनबाद, एनआईटी दुर्गापुर, दिल्ली विश्वविद्यालय, एफएमएस, बिट्स पिलानी, एमिटी विश्वविद्यालय, एमएनआईटी और ज़ेवियर इंस्टिट्यूट भुवनेश्वर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने भाग लिया। कोलोक़्वियम में कई शैक्षणिक और सहभागिता गतिविधियां आयोजित की गईं जिनमें शोध-पत्र प्रस्तुतियां, व्यावहारिक कार्यशाला, नेटवर्किंग सत्र, भ्रमण कार्यक्रम और श्रेष्ठ शोध-पत्र पुरस्कार शामिल थे। पहले दिन 18 थीमैटिक ट्रैक्स में 91 शोधपत्र 110 शोधकर्ताओं ने प्रस्तुत किए। दूसरे दिन 9 ट्रैक्स में 47 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। शोध विषयों में एआई नैतिकता, डिजिटल गवर्नेंस, सर्कुलर इकोनॉमी, ग्रीन फाइनेंस, सतत संचालन और तकनीक आधारित विकास शामिल रहे।
प्रो. सोमनाथ चक्रवर्ती, निदेशक (प्रभारी) एवं डीन अकादमिक मामलों ने कहा कि विकसित भारत 2047 का विज़न और आत्मनिर्भर भारत का मिशन तभी साकार होगा जब शिक्षा राष्ट्रीय उत्कृष्टता की आधारशिला बनेगी। एवीएसएम के मेजर जनरल (सेनि) बीडी वाधवा, अकाउंटिंग फाइनेंस इकोनॉमिक्स एंड गवर्नेंस, रोहेम्पटन बिजनेस स्कूल यूके की प्रमुख प्रो. ममता परही ने संबोधित किया।
कार्यक्रम में भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग के सचिव व पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग वी.श्रीनिवास, मैनेजमेंट स्टडीज विभाग आईआईटी मद्रास के प्रो. डॉ. सी राजेंद्रन, बैंकिंग एंड फाइनेंस डिपार्टमेंट, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथहैम्पटन के प्रो. तपस मिश्रा, प्रो. सब्यसाची पात्रा, प्रो. आशीष कुमार, प्रो. प्रीति नारवाल, प्रो. विवेक रॉय आदि मौजूद रहे।