दो जून की रोटी जुटाने के लिए कर्ज लेकर ई-रिक्शा खरीदा। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। लेकिन कुछ महीने बाद परिवहन आयुक्त ने प्रदेश में ई-रिक्शा बंद करने का आदेश जारी कर दिया।
इसके पीछे वजह कुछ भी हो। मगर आदेश मिलते ही पुलिस और एआरटीओ दोनों ही डंडे लेकर सड़क पर उतर पड़े और जिधर भी ई-रिक्शा चलता हुआ मिला। उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी।
शहर में चलने वाले प्रदूषण रहित ई-रिक्शा आसानी से लोगों को मिल जा रहे थे, जो दस-पांच रुपये लेकर लोगों को घरों तक पहुंचा रहे थे। लोगों का कहना है कि अन्य वाहन उन्हें तंग गलियों में घर तक नहीं छोड़ते थे।
यह शहर क्षेत्र में दस किलोमीटर की परिधि में चलते हैं। मगर अब परिवहन विभाग और पुलिसिया कार्रवाई के चलते ई-रिक्शा चालक भयभीत हैं।
उनके समझ में नहीं आ रहा है, वह क्या करें? कैसे कर्ज चुकता करें? कैसे परिवार का भरण पोषण करें? यह सब सवाल रिक्शा चालकों के जहन में कौंध रहे हैं।
उनका कहना है कि वह बहुत ज्यादा कानूनी-दांव पेंच नहीं जानते हैं। उन्हें तो दो जून की रोटी से मतलब है। खरीदते समय उन्हें इतना बताया गया था, कि परिवहन विभाग में इसका रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं है।