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Udham Singh Nagar News: मौसम में बदलाव से बढ़े जुकाम-बुखार के मरीज

Sat, 02 Mar 2024 11:28 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
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Iजिला अस्पताल और निजी अस्पताल में पहुंच रहे मरीज, II25 मरीज सर्दी, जुकाम, बुखार से पीड़ित पहुंच रहे अस्पतालI
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रुद्रपुर।
मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव से सर्दी, जुकाम, बुखार के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। जिला अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए मरीज पहुंच रहे हैं। उधर चिकित्सक इलाज के साथ बचाव की सलाह भी दे रहे हैं। शनिवार को जिला अस्पताल में बारिश के बावजूद सर्दी, जुकाम, बुखार से पीड़ित 25 मरीज पहुंचे।
मार्च महीने की शुरूआत में अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया था। यही हाल फरवरी के अंतिम सप्ताह में भी रहा। वहीं सुबह से ही तेज धूप के चलते मौसम सामान्य हो गया और रात में तापमान सात से आठ डिग्री कम हो रहा था। तापमान में उतार-चढ़ाव का क्रम जारी रहने से अधिकतर लोग सर्दी, जुकाम और वायरल बुखार की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। चिकित्सक भी लोगों को बचाव की सलाह देते हैं।
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Iमौसम में बदलाव के साथ ही दिन और रात के तापमान में काफी अंतर आ रहा है। ऐसे मौसम में लोगों को काफी सतर्कता बरतने की जरूरत है। अगर कोई खांसी, जुकाम, बुखार, सर्दी आदि से पीड़ित है तो तुरंत नजदीकी चिकित्सक से परामर्श लें।
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- डाॅ. आरके सिन्हा, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल, रुद्रपुर। I
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बेजुबानों पर भी पड़ रही बदलते मौसम की मार
पार्वो वायरस की चपेट में आ रहे हैं पालतू कुत्ते
रुद्रपुर।
मौसम में हो रहे बदलाव का असर बेजुबानों में भी देखने को मिल रहा है। कुत्तों में पार्वो वायरस नाम की बीमारी तेजी से फैल रही है। समय से इलाज नहीं होने पर कुत्तों की जान जाने का खतरा रहता है। पशु चिकित्सक लोगों को अपने कुत्ते को बीमारी से बचाने के लिए वैक्सीनेशन कराने की सलाह दे रहे हैं। दरअसल पार्वो वायरस कुत्तों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। इससे ग्रसित कुत्ता उल्टी दस्त के साथ ही पानी बहुत पीता है। कुत्ते के मुंह से झाग आने के साथ ही छींकता भी है। पशु अस्पताल में तीन से चार केस आ रहे हैं। वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि वैक्सीनेशन कराकर ही कुत्ते को वायरस से बचाया जा सकता है। यह वायरस लावारिस कुत्तों की तुलना में पालतू कुत्तों में ज्यादा फैलता है। कई बार इस रोग की चपेट में आने से कुत्ते की जान चली जाती है। कहा कि कई बार लोग कुत्ते पालते हैं, मगर वैक्सीनेशन नहीं कराते हैं। इसके अलावा कैनाइन डिस्टैंपर की चपेट में भी कुत्ते आ रहे हैं। हालांकि इसके एक से दो केस ही रोजाना अस्पताल में आ रहे हैं। इसकी चपेट में आए कुत्ते को दौरे पड़ते हैं। इसके साथ ही कुत्ते की आंखों से पदार्थ निकलना, बुखा, उल्टी दस्त के साथ ही सांस लेने में परेशानी होती है। इसका प्रभाव अभी कुत्तों में कम हैे।
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