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दूधियाबाबा मंदिर गेट तोड़े जाने की खबर पर प्रदर्शन

Wed, 29 Jun 2016 11:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊधमसिंह नगर
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प्रदश्‍ाग्‍नन - फोटो : अमर उजाला
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एनएच 74 के चौड़ीकरण की जद में आने से दूधिया बाबा मंदिर गेट तोड़े जाने की सूचना जैसे ही आसपास के वार्डों में पहुंची, वैसे ही भारी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। उन्होंने दूधिया बाबा शिवानंद महाराज और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़ की मौजूदगी में एनएच अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की और सांकेतिक जाम लगाया। 
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आगाह किया कि यदि मंदिर परिसर को क्षतिग्रस्त किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। 
बुधवार सुबह किच्छा मार्ग स्थित दूधिया मंदिर का मुख्य गेट तोड़े जाने की सूचना भदईपुरा, रंपुरा सहित आसपास के वार्डों में पहुंची, तो दूधिया बाबा समर्थक पहुंच गए। 

सूचना मिलने पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बेहड़ और महानगराध्यक्ष जगदीश तनेजा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने समर्थकों के साथ एनएच अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और सांकेतिक जाम लगाया। कहना था कि निर्माणाधीन एजेंसी चौड़ीकरण के नाम पर धार्मिक स्थलों को क्षति पहुंचाने का काम कर रही है। यदि एजेंसी चाहे तो मंदिर को नुकसान नहीं पहुंच सकता। 
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इस मौके पर गजेंद्र सिंह राघव, राजेश सिंह, चंद्रसेन कोली, चंचल शुक्ला, मनोज शर्मा, आंगन लाल शर्मा, पिंटू पाल, विजय यादव, होरी लाल, कल्याण सिंह, सुभाष छाबड़ा, मक्खन लाल, छेदालाल पाल, प्रेम पाल, हर स्वरुप, नितिन शर्मा, अर्जुन गंगवार आदि मौजूद थे। 


सांसद व केंद्रीय मंत्री करें हस्तक्षेप : बेहड़

धरना प्रदर्शन के दौरान पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बेहड़ ने जारी एक बयान में कहा कि एनएच चौड़ीकरण के नाम पर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया जा रहा है। कहा कि एनएच का कार्य भारत सरकार के इशारे पर किया जाता है। ऐसे में सांसद भगत सिंह कोश्यारी व केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी को हस्तक्षेप करना चाहिए। आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने लोगों को गुमराह किया है। यदि धार्मिक स्थल, दुकानें, मकानों को क्षति पहुंचाने की कोशिश की गई, तो जनांदोलन किया जाएगा। 


षड्यंत्र के तहत नहीं किया आमंत्रित : ठुकराल

दूधियाबाबा मंदिर गेट को तोड़े जाने के विरोध में हुए प्रदर्शन प्रकरण में विधायक राजकुमार ठुकराल ने कहा कि दूधियाबाबा मंदिर संचालक शिवानंद महाराज ने षड्यंत्र के तहत आंदोलन के दौरान उन्हें आमंत्रित नहीं किया। जिससे साफ होता है कि एक राजनैतिक दल व व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए मंदिर संचालक ने विकृत मानसिकता का परिचय दिया है। कहा कि हमेशा उन्होंने धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए संघर्ष किया, लेकिन हिंदू विरोधी नेताओं को बुलाकर शिवानंद महाराज ने दोहरी नीति का परिचय दिया है। 
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